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| आचार्य धनीराम, मोबाइल-9417115003 |
इस समय शुक्र पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में मीन में आया है। 16 मई 2014 के लगभग शुक्र परम उच्च का होगा, यानी पूरे प्रभाव में होगा। शुक्र के उच्च काल में फिल्म, फैशन, ग्लैमर, वस्त्र, चांदी, रत्नों आदि के कारोबार में उछाल आएगा। तेल, खेती, व्यापार में भी लाभ होगा। 16 मई 2014 को शुक्र परम उच्च का होगा उसी समय लोकसभा चुनाव के परिणाम आएंगे। उस समय चंद्रमा नीच का रहेगा, यह स्थिति देश में सरकार बदलने का संकेत कर रही है।
सभी राशियों के लिए मई माह का राशिफल
मेष- शुक्र मीन में मेष राशि से बारहवां हो जाएगा जो कि ज्यादा लाभकारी नहीं रहेगा। खिन्नता रहेगी एवं प्रभाव में कमी आएगी। धन की कमी महसूस होगी। अपमान हो सकता है।
वृषभ- राशि स्वामी शुक्र उच्च का एवं ग्यारहवां होने से आप अत्यधिक लाभ में रहेंगे। धन लाभ के साथ सम्मान की प्राप्ति होगी। परिवार में खुशियां एवं संतान का सुख प्राप्त होगा। विवाह प्रस्ताव मिलेंगे।
मिथुन- दसवां शुक्र आपका जीवन अनियमित बना सकता है। धन की पूर्ति सामान्य रहेगी। ऋण का अंत होगा एवं संतान की समस्याओं से ग्रसित हो सकते हैं। यात्रा का योग भी बनाएगा।
कर्क- आपके लिए नवम शुक्र शुभ समाचारों की वृद्धि करेगा। शुक्र अटके कार्यों में गति प्रदान करेगा। धन की पूर्ति सहज होगी एवं विवादों का निपटारा होगा। कोई बड़ी उपलब्धि मिल सकती है। जीवन साथी से सामंजस्य रहेगा।
सिंह- अब आपके लिए शुक्र आठवां रहेगा, जो कि राशि के स्वभाव के अनुसार ही फल प्रदान करेगा। अकेलेपन एवं वैराग्य की वृद्धि रहेगी। सुविधाओं के प्रति आकर्षण कम होगा एवं अध्यात्मिकता की ओर झुकाव होगा।
कन्या- सातवां शुक्र उत्तम फल प्रदान करने वाला होगा। आर्थिक स्थिति मजबूत करेगा एवं नई जिम्मेदारियों की प्राप्ति होगी। सोचे हुए कार्य समय पर होंगे एवं लक्ष्य को प्राप्त करने में सफल होंगे।
तुला- आपकी राशि का स्वामी शुक्र अब छठा हो जाएगा। उच्च का शुक्र शुभ फल प्रदान करेगा। समस्याओं का अंत करने के साथ ही सौन्दर्य में वृद्धि करेगा। धन की कमी पूरी होगी एवं नौकरी में प्रमोशन के साथ धन लाभ होगा।
वृश्चिक- आपके लिए पांचवां शुक्र अच्छा फल प्रदान करने वाला होगा। जीवन की अनियमितताएं समाप्त होंगी एवं विचारों में सुधार होगा। आत्मबल मजबूत होगा तथा कई कार्यों को एक साथ करने में सक्षम होंगे।
धनु- आपके लिए चतुर्थ शुक्र धन संबंधी समस्याएं बढ़ाएगा। अन्य लोगों के कारण परेशान रहेंगे एवं उनकी समस्याएं सुलझाने में समय व्यतीत होगा। विवादों में फंसने का संकट बना हुआ है। घर-परिवार की चिंता बनी रहेगी।
मकर- आपके लिए तृतीय शुक्र श्रेष्ठ फल प्रदान करने वाला होगा। राशि का मित्र होने के साथ वह अनुकूल भी रहेगा। सोच से अधिक लाभ होगा एवं विवादों में विजय प्राप्त होगी। प्रेम की प्राप्ति होगी।
कुंभ- आपके लिए द्वितीय शुक्र एवं राशि मित्र होने से सकारात्मक स्थितियां निर्मित होंगी। आर्थिक उन्नति के साथ ही संबल प्राप्त होगा। जीवनसाथी का सहयोग मिलेगा एवं धन लाभ के साथ प्रभाव में वृद्धि करेगा। नई योजनाएं प्राप्त होंगी।
मीन- इसी राशि में शुक्र होने से यह प्रथम और उच्च का रहेगा। कई सफलताओं के साथ प्रभाव में भी वृद्धि होगी। मई के मध्य में शुक्र पूरे चरम पर होगा। सभी ओर से अनुकूल समाचार मिलेंगे। लाभ बढ़ जाएगा।
हिंद प्रहरी संवाददाता

सफलता का रास्ता कठिन नहीं तो सरल भी नहीं है। इस रास्ते पर अनेक मुसीबतें आती हैं। ये मुसीबतें हैं, अहंकार, सफलता-असफलता का डर, योजना की कमी, लक्ष्य का अभाव, जिंदगी का बदलाव, विश्वास की कमी, आर्थिक असुरक्षा, असह्य पारिवारिक दायित्व, दिशाहीनता, अकेलेपन का अहसास, सारा बोझ स्वयं उठाना, क्षमता से अधिक स्वयं को बांधना, प्रशिक्षण, दृढ़ता व प्राथमिकता की कमी। इन कठिनाइयों को पार करके ही सफलता का सेहरा सिर पर बंधता है।
ReplyDeleteसफलता यानी लगातार प्रयास
अर्ल नाइटिंगेल के अनुसार, “मूल्यवान लक्ष्य की लगातार प्राप्ति का नाम ही सफलता है।” सफलता सतत प्रयास का नाम है। सफलता एक सफर है, मंजिल नहीं। मंजिल या लक्ष्य प्राप्ति के पश्चात् ठहर जाना सफलता का अंत है। लक्ष्य मिलने पर एक सुखद अनुभव होता है।
कुंडली में कई योग ऐसे हैं, जिन्हें अशुभ माना जाता है। ऐसा ही एक अशुभ योग है अंगारक योग। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में राहु या केतु के साथ मंगल की युति हो तो अंगारक योग बनता है।
ReplyDeleteअंगारक योग का असर
जिस व्यक्ति की कुंडली में अंगारक योग बनता है, उसकी सोच नकारात्मक होती है। इस योग से व्यक्ति भाइयों, मित्रों तथा अन्य रिश्तेदारों के साथ अच्छे संबंध नहीं रख पाता है।
राहु के साथ मंगल हो तो
यदि राहु के साथ मंगल का योग किसी की कुंडली में होता है तो व्यक्ति अपनी मेहनत से नाम और पैसा कमाता है। ऐसे लोगों के जीवन में कई उतार-चढ़ाव आते हैं। यह योग अच्छा और बुरा दोनों तरह का फल देता है।
अंगारक योग के उपाय
यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में अंगारक योग हो तो उसे मंगल और राहु-केतु की शांति करवानी चाहिए। साथ ही, अंगारक स्तोत्र का पाठ करना चाहिए।
अंगारक स्तोत्र
विनोयग- अस्य श्री अंगारकस्तोत्रस्य विरूपांगिरस ऋषिः अग्निर्देवता गायत्रीच्छंदः भौमप्रीत्यर्थं जपे विनोयगः।
स्तोत्रम्
अंगारकः शक्तिधरो लोहितांगो धरासुतः।
कुमारो मंगलो भौमो महाकायो धनप्रदः।।
ऋणहर्ता दृष्टिकर्ता रोगकृद्रोगनाशनः।
विघुत् प्रभो व्रणकरः कामदो धनह्रत् कुजः।।
सामगानप्रियो रक्तवस्त्रो रक्तायतेक्षणः।
लोहितो रक्तवर्णश्च सर्वकर्माविरोधकः।।
रक्तामाल्यधरो हेमकुण्डली ग्रहनायकः।
नामान्येतानि भौमस्य यः पठेत् सततं नरः।।
ऋणं तस्य हि दौर्भाग्यं दारिद्रयं च विनश्यति।
धनं प्राप्नोति विपुलं स्त्रियं चैव मनोरमाम्।।
वंशोघोतकरं पुत्रं लभते नाऽत्र संशयः।
योऽर्चयेदह्नि भौमस्य मंगलं बहुपुष्पकैः।।
सर्वा नश्यति पीडा च तस्य ग्रहकृता ध्रुवम्।।
कुंडली मिलान और वैवाहिक जीवन ======================= विवाह योग्य जातक-जातिका की विवाह से पूर्व अधिकतर व्यक्ति कुंडली मिलान करके विवाह करते है तो कुछ बिना कुंडली मिलान के भी विवाह कर लेते है।वर-वधु की कुंडली में विवाह और वैवाहिक जीवन का पूर्ण व्योरा लिखा होता जिसे एक कुशल ज्योतिषी ही ठीक प्रकार से पढ़ सकता है।लेकिन कई बार बहुत से लोग विवाह योग्य जातक-जातिका की कुंडली का मिलान केवल गुणों के आधार आधार पर कर देते है जैसे- केवल वर्ण, नक्षत्र, गण, राशि आदि के आधार पर, पूर्ण कुंडली मिलान ठीक प्रकार से नही करते।जिसके कारण जिन जातक-जातिकाओ की कुंडली में वैवाहिक जीवन संबंधी समस्या होती है उन्हे उनकी कुंडली के उचित गुण मिलान के बाद भी समस्याओ का सामना करना पड़ता है।मैंने कई लोगो से कहते सुना हमारी कुंडली के 26 गुण मिले थे, 30 गुण मिले थे, बगेरा-बगेरा आदि, इतने गुण मिलने के बाद भी हमारे वैवाहिक जीवन में परेशानी हो रही है।अब यहाँ तक बात समझ में आती है कि अच्छे गुण मिले थे ठीक है लेकिन केवल गुण मिलान ठीक मिलने से वैवाहिक जीवन के बारे में पूर्णतः ठीक भविष्यवाणी नही की जा सकती उसके लिए आवश्यक है गुण मिलान के साथ-साथ वर-वधु की कुंडली के ग्रह, लग्न, लग्नेश, कुंडली का सप्तम भाव, सप्तमेश जो मुख्य रूप से विवाह और वैवाहिक जीवन के सुख का भाव और भावेश है।कुंडली का बारहवां भाव, बारहवे भाव का स्वामी, विवाह कारक ग्रह गुरु-शुक्र आदि की स्थिति पर विचार करना चाहिए।मन के कारक चंद्र की स्थिति भी देखना जरुरी होता है क्योंकि मन ही किसी भी भावना, किसी भी प्रकार की अनुभूति महसूस होना चंद्र से सम्बंधित है।पुरुष की कुंडली में मुख्य रूप से शुक्र और स्त्री की कुंडली में मुख्य रूप से गुरु के बल और उसकी शुभ-अशुभ स्थिति का परीक्षण करना चाहिए।उपरोक्त ये भाव, भावेश, विवाह संबंधी भाव, भावेश, विवाह संबंधी ग्रह, विवाह के बाद वर-वधु पर आने वाली ग्रह दशाएं आदि का ठीक प्रकार परीक्षण करके विवाह के लिए वर-वधु की कुंडली का मिलान किया जायेगा तो वर-वधु के वैवाहिक जीवन की ठीक जानकारी प्राप्त होती है।अंतिम बात यहाँ यही कहना चाहता हूँ केवल गुण मिलान के आधार पर विवाह और वैवाहिक जीवन को पूर्ण सच न स्वीकार करे उसके लिए कुंडली के विवाह संबंधी ग्रह, भाव, भावेश आदि का ठीक प्रकार से मिलान करके वर-वधु के विवाह के सम्बन्ध में अंतिम निर्णय पर पहुचना चाहिए।
ReplyDeleteराशि अनुसार सावन महीने में शिवजी को प्रसन्न करने के उपाय :
ReplyDelete🍀 पुराणों के अनुसार जब देवी सती ने योग शक्ति से अपने शरीर का त्याग किया था (उससे पहले सती ने महादेव को हर जन्म में पति के रूप में पाने का प्रणलिया था) अपने दुसरे जन्म में देवी सती ने पार्वती के रूप में जन्म लिया | उन्होनें सावन महीनें में कठोर व्रत करके महादेव को प्रसन्न किया, जिसके बाद श्रावण मास महादेव को प्रिय हो गया । अत: सावन महीने में शिवजी की आराधना का विशेष महत्व होता है ... कल से पवित्र सावन मास का आरंभ हो रहा है, तो हर व्यक्ति अपनी राशि के अनुसार निम्न उपाय कर के शिवजी को प्रसन्न करे..
🌟 राशि अनुसार सावन महीने के विशेष उपाय :
🐏 मेष राशि:- श्रावण मास में हर रोज बेलपत्र पर लाल चंदन से ओम नम: शिवाय लिखें। इसी मंत्र का जाप करते हुए जलाभिषेक करें। तत्पश्चात यह बेलपत्र शिवलिंग पर अर्पित कर दें।
🐂 वृषभ राशि:- सर्वप्रथम शिवलिंग पर गंगाजल और दही से अभिषेक करें। उसके बाद कच्चा दूध चढ़ाएं। तत्पश्चात जल के साथ द्वादश ज्योर्तिलिंगों के मंत्रों का उच्चारण करें। शिवलिंग पर श्वेतचंदन से तिलक करें ।
💞 मिथुन राशि:- हर रोज ऊँ नम: शिवाय का जाप करते हुए गंगाजल में श्रद्धानुसार शहद मिलाकर शिवलिंग पर अभिषेक करें।
🦀 कर्क राशि:- गंगाजल, दूध व मिश्री मिलाकर ऊँ चंद्र मोलेश्वराय नम: इस मंत्र का जाप करते हुए शिवलिंग पर अभिषेक करें।
🦁 सिंह राशि:- श्रद्धानुसार शुद्ध देसी घी से ऊँ अनंनताय नम: मंत्र का जाप करते हुए शिवलिंग पर अभिषेक करें।
💃 कन्या राशि:- ऊँ त्रिमूर्तितेय नम: मंत्र का जाप करते हुए दूध, घी और शहद से शिवलिंग पर अभिषेक करें।
⚖ तुला राशि:- दही और गन्ने के रस से शिवलिंग पर ऊँ श्री कंठाय नम: मंत्र का जाप करते हुए अभिषेक करें।
🦂 वृश्चिक राशि:- गंगाजल में दूध और शक्कर मिलाकर ऊँ नम: शिवाय कालं महाकाल कालं कृपालं ऊं नम: मंत्र का जाप करते हुए शिवलिंग पर अभिषेक करें।
🏹 धनु राशि:- गंगाजल, कच्चे दूध व केसर मिलाकर ऊँ महेश्वराय नम: इस मंत्र का जाप करते हुए शिवलिंग पर अभिषेक करें।
🐊 मकर राशि:- बादाम के तेल से ऊँ सर्वभूतहराय नम: मंत्र का जाप करते हुए शिवलिंग पर अभिषेक करें।
🍯 कुंभ राशि:- घी, शहद और शक्कर से ऊँ अव्यक्ताय नम: मंत्र का जाप करते हुए शिवलिंग पर अभिषेक करें।
🐬 मीन राशि:- कच्चे दूध, केसर
कुण्डली के अशुभ योगों की शान्ति
ReplyDelete1).चांडाल योग=गुरु के साथ राहु या केतु हो तो जातकको चांडाल दोष है
2).सूर्य ग्रहण योग=सूर्य के साथ राहु या केतु हो तो
3). चंद्र ग्रहण योग=चंद्र के साथ राहु या केतु हो तो
4).श्रापित योग -शनि के साथ राहु हो तो दरिद्री योग होता है
5).पितृदोष- यदि जातक को 2,5,9 भाव में राहु केतु या शनि है तो जातक पितृदोष से पीड़ित है.
6).नागदोष - यदि जातक को 5 भाव में राहु बिराजमान है तो जातक पितृदोष के साथ साथ नागदोष भी है.
7).ज्वलन योग- सूर्य के साथ मंगल की युति हो तो जातक ज्वलन योग(अंगारक योग) से पीड़ित होता है
8).अंगारक योग- मंगल के साथ राहु या केतु बिराजमान हो तो जातक अंगारक योग से पीड़ित होता है.
9).सूर्य के साथ चंद्र हो तो जातक अमावस्या का जना है
10).शनि के साथ बुध = प्रेत दोष.
11).शनि के साथ केतु = पिशाच योग.
12).केमद्रुम योग- चंद्र के साथ कोई ग्रह ना हो एवम् आगे पीछे के भाव में भी कोई ग्रह न हो तथा किसी भी ग्रह की दृष्टि चंद्र पर ना हो तब वह जातक केमद्रुम योग से पीड़ित होता है तथा जीवन में बोहोत ज्यादा परिश्रम अकेले ही करना पड़ता है.
13).शनि + चंद्र=विषयोग शान्ति करें
14).एक नक्षत्र जनन शान्ति -घर के किसी दो व्यक्तियों का एक ही नक्षत्र हो तो उसकी शान्ति करें.
15).त्रिक प्रसव शान्ति- तीन लड़की के बाद लड़का या तीन लड़कों के बाद लड़की का जनम हो तो वह जातक सभी पर भारी होता है
16).कुम्भ विवाह= लड़की के विवाह में अड़चन या वैधव्य योग दूर करने हेतु.
17).अर्क विवाह = लड़के के विवाह में अड़चन या वैधव्य योग दूर करने हेतु.
18).अमावस जन्म- अमावस के जनम के सिवा कृष्ण चतुर्दशी या प्रतिपदा युक्त अमावस्या जन्म हो तो भी शान्ति करें
19).यमल जनन शान्ति=जुड़वा बच्चों की शान्ति करें.
🙏 जानिये नक्षत्र जिनकी शान्ति करना जरुरी है
ReplyDelete1).अश्विनी का- पहला चरण.(1).अशुभ है.
2).भरणी का - तिसरा चरण.(3).अशुभ है.
3).कृतीका का - तीसरा चरण.(3).अशुभ है.
4).रोहीणी का - पहला
राशि - लक्ष्मी मंत्र🕉
ReplyDeleteमेष - ॐ ऐं क्लीं सौं:
वृषभ - ॐ ऐं क्लीं श्रीं
मिथुन - ॐ क्लीं ऐं सौं:
कर्क - ॐ ऐं क्लीं श्री
सिंह - ॐ ह्रीं श्रीं सौं:
कन्या - ॐ श्रीं ऐं सौं:
तुला - ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं
वृश्चिक - ॐ ऐं क्लीं सौं:
धनु - ॐ ह्रीं क्लीं सौं:
मकर - ॐ ऐं क्लीं ह्रीं श्रीं सौं:
कुंभ - ॐ ह्रीं ऐं क्लीं श्रीं
मीन - ॐ ह्रीं क्लीं सौं:
*राहु का अन्य ग्रहों पर प्रभाव*
ReplyDeleteराहु-केतु छाया ग्रह हैं, परंतु उनके मानव जीवन पर पड़ने वाले
प्रभाव के आधार पर हमारे तत्ववेत्ता ऋषि-मुनियों ने उन्हें
नैसर्गिक पापी ग्रह की संज्ञा दी है। केतु को ‘कुजावत’
तथा राहु को ‘शनिवत्’ कहा गया है। परंतु जहां शनि का
प्रभाव धीरे-धीरे होता है, राहु का प्रभाव अचानक और
तीव्र गति से होता है। राहु-केतु कुंडली में आमने-सामने 1800
की दूरी पर रहते हैं और सदा वक्र गति से गोचर करते हैं। राहु
‘इहलोक’ (सुख-समृद्धि) तथा केतु ‘परलोक’ (आध्यात्म), से
संबंध रखता है। यह कुंडली के तीसरे, छठे और ग्यारहवें भाव में
अच्छा फल देते हैं। सूर्य और चंद्रमा से राहु की परम शत्रुता है।
शुभ ग्रहों से युति व दृष्टि संबंध होने पर राहु सभी प्रकार के
सांसारिक -शारीरिक, मानसिक और भौतिक -सुख देता है,
परंतु अशुभ व पापी ग्रह से संबंध कष्टकारी होता है। फल की
प्राप्ति संबंधित ग्रह के बलानुपात में होती है। राहु से
संबंधित अशुभ ग्रह की दशा जितने कष्ट देती है, उससे अधिक
कष्टकारी राहु की दशा-भुक्ति होती है। राहु द्वारा
ग्रसित होने पर सूर्य अपने कारकत्व - पिता, धन, आदर,
सम्मान, नौकरी, दाहिनी आंख, हृदय आदि- संबंधी कष्ट
देता है। बहुत मेहनत करने पर भी लाभ नहीं मिलता। साथ ही
सूर्य जिस भाव का स्वामी होता है उसके फल की हानि
होती है। व्यक्ति के व्यवहार में दिखावा, घमंड व
बड़बोलापन अंततः हानिकारक सिद्ध होता है। राहु
द्वारा ग्रस्त होने पर चंद्रमा जातक की माता को कष्ट
देता है। पारिवारिक शांति भंग होती है। जातक स्वयं
छाती, पेट, बाईं आंख के रोग, या मानसिक संताप से ग्रसित
होता है। उसे डर, असमंजस और चिंता के कारण नींद नहीं
आती और वह बुरी आदतों में लिप्त हो जाता है। चंद्रमा के
निर्बल और पीड़ित होने पर जातक हताशा में आत्महत्या तक
कर लेता है। राहु द्वारा ग्रसित होने पर मंगल जातक को उग्र
व क्रोधी बनाता है। वह चिड़चिड़ा और आक्रामक बन
जाता है तथा समाज और कानून विरोधी कार्य करता है,
लड़ाई-झगड़ा, संपत्ति हानि, चोट, फोड़ा-फुंसी, पित्त व
रक्त-विकार, बुखार आदि की संभावना बढ़ जाती है। मंगल
के स्वामित्व वाले भावों संबंधी कार्यों में अवरोध व हानि
होती है। राहु द्वारा शुक्र के ग्रसित होने पर व्यक्ति अपनी
सुख-सुविधाओं को अनैतिक रूप से प्राप्त करता है। उसे चेहरा,
गला, आंख, किडनी, प्रजनन प्रणाली ओर यौन रोग
राशिफल: मंगल शनि में हो रही तकरार किस राशि पर दुश्मन करेंगे पलटवार,दैनिक शुभाशुभ: 29.07.16 मंगलवार, चंद्र मीन राशि, रेवती नक्षत्र, भाग्यांक 5, शुभरंग हरा, शुभदिशा उत्तर, राहुकाल शाम 3 से शाम 4:30 तक।
ReplyDeleteउपाय: सभी 12 राशियों के व्यक्ति दुश्मनों से बचने के लिए दूध में अपनी छाया देखकर हनुमान मंदिर में चढ़ाएं।
मेष: मन नियंत्रित कर जरूरी दायित्वों की पूर्ति करेंगे। स्थिति वश समझौतावादी बनेंगे। पेंडिंग वर्क के पूरा होने पर मन में उत्साह रहेगा।
शुभाशुभ: शुभ अंक 5, शुभ रंग हरा, शुभ दिशा पूर्व, शुभ समय शाम 04:30 से सायं 06:00 तक।
वृष: शाम तक काम बनते नजर आएंगे। पुरानी बातें भुलाकर समझौता करना पड़ेगा। प्रेम संबंध को लेकर पारिवारिक तनाव पैदा होगा।
शुभाशुभ: शुभ अंक 2, शुभ रंग सफ़ेद, शुभ दिशा उत्तर-पश्चिम, शुभ समय सुबह 09:00 से सुबह 10:30 तक।
मिथुन: अचल सम्पत्ति को लेने की योजना बनेगी। कांफिडेंस से महत्वपूर्ण कार्यों की पूर्ति होगी। प्रेम व दांपत्य जीवन सुखमय रहेगा।
शुभाशुभ: शुभ अंक 1, शुभ रंग लाल, शुभ दिशा पूर्व, शुभ समय सुबह 09:00 से सुबह 10:30 तक।
कर्क: आर्थिक योजनाएं सार्थक होंगी। कार्यों में रुकावटें आएंगी। व्यक्तिगत संबंधों से पारिवारिक विवाद व निजी जीवन अशांत होगा।
शुभाशुभ: शुभ अंक 7, शुभ रंग कबूतरी, शुभ दिशा उत्तर-पूर्व, शुभ समय दोपहर 12:00 से दिन में 01:30 तक।
सिंह: बुद्धिमत्ता से समस्याओं का समाधान होगा। पारिवारिक एकता हेतु मन केंद्रित होगा। रोजगार में व्यस्तता रहेगी। जरूरी कार्य पूरा कर लेंगे।
शुभाशुभ: शुभ अंक 6, शुभ रंग गुलाबी, शुभ दिशा दक्षिण-पूर्व, शुभ समय सुबह 07:30 से सुबह 09:00 तक।
कन्या: कार्यक्षेत्र में सहयोग मिलेगा। आमदनी के नए रास्ते खुलेंगे। पारिवारिक समस्याएं परेशान करेंगी। भविष्य संबंधी योजनाएं बनाएंगे।
शुभाशुभ: शुभ अंक 1, शुभ रंग लाल, शुभ दिशा पूर्व, शुभ समय सुबह 09:00 से सुबह 10:30 तक।
तुला: गृह परिवर्तन की चिंता सताएगी। परिजन की अस्वस्थता से परेशान होंगे। कार्य सफलता से उत्साहित होंगे। रोजगार में लाभ होगा।
शुभाशुभ: शुभ अंक 2, शुभ रंग सफ़ेद, शुभ दिशा उत्तर-पश्चिम, शुभ समय सुबह 09:00 से सुबह 10:30 तक।
वृश्चिक: रचनात्मक योजनाएं निरर्थक होंगी। पार्टनर का स्वास्थ्य चिंतित करेगा। अनजान व्यक्ति की बातों में आकर उलझन पैदा होगी।
शुभाशुभ: शुभ अंक 5, शुभ रंग हरा, शुभ दिशा पूर्व, शुभ समय शाम 04:30 से सायं 06:00 तक।
धनु: पुरानी घटनाओं की स्मृति से मानसिक परेशानी होगी। प्रोपर्टी संबंधित विवाद सुलझेगा। नकारात्मक विचार उत्साह कम करेंगे।
शुभाशुभ: शुभ अंक 8, शुभ रंग काला, शुभ दिशा पश्चिम, शुभ समय शाम 03:00 से शाम 04:30 तक।
मकर: आखें मूंद कर कार्य न करें। पार्टनर रोगग्रस्त होगा। पूर्वानुमान से शंकाग्रस्त रहेंगे। गलती स्वीकारकर संबंधों में क्षमा याचक बनें।
शुभाशुभ: शुभ अंक 4, शुभ रंग नीला, शुभ दिशा दक्षिण-पश्चिम, शुभ समय सुबह 07:30 से सुबह 09:00 तक।
कुंभ: सृजनात्मक विचारों का लाभ उठाएं। पूर्वनिर्धारित कार्यों में मनोवांछित सिद्धि मिलेगी। पेंडिंग वर्क समय अनुकूल पूरा होगा।
शुभाशुभ: शुभ अंक 4, शुभ रंग नीला, शुभ दिशा दक्षिण-पश्चिम, शुभ समय सुबह 07:30 से सुबह 09:00 तक।
मीन: मनसूबे कामयाब होंगे। लोग विचारों से प्रभावित होंगे। नकारात्मक विचार त्यागने से क्षमताएं निखरेंगी। महत्वपूर्ण कार्य बनेंगे।
शुभाशुभ: शुभ अंक 8, शुभ रंग काला, शुभ दिशा पश्चिम, शुभ समय शाम 03:00 से शाम 04:30 तक।
संकटनाशनं गणपतिस्तोत्रं
ReplyDeleteप्रणम्य शिरसा देवं गौरीपुत्रं विनायकम्
भक्तावासं स्मरेनित्यम आयुष्कामार्थ सिध्दये ॥1॥
प्रथमं वक्रतुण्डं च एकदन्तं द्वितीयकम्
तृतीयं कृष्णपिङगाक्षं गजवक्त्रं चतुर्थकम ॥2॥
लम्बोदरं पञ्चमं च षष्ठं विकटमेव च
सप्तमं विघ्नराजेन्द्रं धुम्रवर्णं तथाषष्टम ॥3॥
नवमं भालचंद्रं च दशमं तु विनायकम्
एकादशं गणपतिं द्वादशं तु गजाननम ॥4॥
द्वादशेतानि नामानि त्रिसंध्यं यरू पठेन्नररू
न च विघ्नभयं तस्य सर्वसिध्दीकर प्रभो ॥5॥
विद्यार्थी लभते विद्यां धनार्थी लभते धनम्
पुत्रार्थी लभते पुत्रान्मोक्षार्थी लभते गतिम ॥7॥
जपेद्गणपतिस्तोत्रं षडभिर्मासे फलं लभेत्
संवत्सरेण सिध्दीं च लभते नात्र संशयरू ॥8॥
अष्टभ्यो ब्राह्मणेभ्यश्च लिखित्वा यरू समर्पयेत
तस्य विद्या भवेत्सर्वा गणेशस्य प्रसादतरू ॥9॥
श्री नारदपुराणे संकटनाशनं नाम श्री गणपतिस्तोत्रं
अपने पूर्वजों से सुने गए कुछ परंपरागत उपाय करने से लाभ मिलने का अनुभव कई लोगों को मिलता है। प्रस्तुत हैं कुछ उपाय-
ReplyDeleteतंत्र शास्त्र: Money Problems को दूर करने के लिए पहने यह माला
* शुक्ल पक्ष में किसी भी दिन अपनी फैक्टरी या दुकान के दरवाजे के दोनों तरफ बाहर की ओर थोड़ा-सा गेहूं का आटा रख दें। ध्यान रहे ऐसा करते हुए आपको कोई देखे नहीं।
* पूजा घर में अभिमंत्रित श्री यंत्र रखें।
नहाने की बाल्टी में मिलाएं ये चीज, बदल सकती है आपकी किस्मत
* यदि किसी को लगातार बुखार आ रहा हो और कोई भी दवा असर न कर रही हो तो आक की जड़ लेकर उसे किसी कपड़े से कस कर बांध लें। फिर उस कपड़े को रोगी के कान से बांध दें।
घर से लेकर कारोबार तक जीवन के हर क्षेत्र में सफलता देगा यह उपाय
* यदि किसी को टायफाइड हो गया हो तो उसे डाक्टर से अनुमति लेकर प्रतिदिन एक नारियल पानी पिलाएं।
* घर में धन का ठहराव न हो तो ध्यान रखें कि आपके घर में कोई नल लीक न करता हो अर्थात पानी टपकता न हो। आग पर रखा दूध या चाय उबलनी नहीं चाहिए वर्ना आमदनी से ज्यादा खर्च होने की संभावना रहती है।
ReplyDeleteश्री ऋणमोचक मंगल स्तोत्र
श्री ऋणमोचक मंगल स्तोत्र
मङ्गलो भूमिपुत्रश्च ऋणहर्ता धनप्रदः।
स्थिरासनो महाकयः सर्वकर्मविरोधकः ॥
लोहितो लोहिताक्षश्च सामगानां कृपाकरः।
धरात्मजः कुजो भौमो भूतिदो भूमिनन्दनः॥
अङ्गारको यमश्चैव सर्वरोगापहारकः।
व्रुष्टेः कर्ताऽपहर्ता च सर्वकामफलप्रदः॥
एतानि कुजनामनि नित्यं यः श्रद्धया पठेत्।
ऋणं न जायते तस्य धनं शीघ्रमवाप्नुयात्॥
धरणीगर्भसम्भूतं विद्युत्कान्तिसमप्रभम्।
कुमारं शक्तिहस्तं च मङ्गलं प्रणमाम्यहम्॥
स्तोत्रमङ्गारकस्यैतत्पठनीयं सदा नृभिः।
न तेषां भौमजा पीडा स्वल्पाऽपि भवति क्वचित्॥
अङ्गारक महाभाग भगवन्भक्तवत्सल।
त्वां नमामि ममाशेषमृणमाशु विनाशय॥
ऋणरोगादिदारिद्रयं ये चान्ये ह्यपमृत्यवः।
भयक्लेशमनस्तापा नश्यन्तु मम सर्वदा॥
अतिवक्त्र दुरारार्ध्य भोगमुक्त जितात्मनः।
तुष्टो ददासि साम्राज्यं रुश्टो हरसि तत्ख्शणात्॥
विरिंचिशक्रविष्णूनां मनुष्याणां तु का कथा।
तेन त्वं सर्वसत्त्वेन ग्रहराजो महाबलः॥
पुत्रान्देहि धनं देहि त्वामस्मि शरणं गतः।
ऋणदारिद्रयदुःखेन शत्रूणां च भयात्ततः॥
एभिर्द्वादशभिः श्लोकैर्यः स्तौति च धरासुतम्।
महतिं श्रियमाप्नोति ह्यपरो धनदो युवा॥
बुधवार दिनांक 16.11.16 को सूर्य अपने नीच राशि से निकल कर मित्र राशि वृश्चिक में आएगा। यहां आने पर सूर्य पुनः अपने तेज को प्राप्त करेगा व उसके नीचत्व में हुई कई घटनाओं में सुधार आएगा। वृश्चिक मंगल की राशि होने के कारण सूर्य की मित्र राशि है जो शुभ फलदायी रहेगी। परंतु वृश्चिक कीट राशि कही जाती है, इसमें सूर्य बहुत अच्छे परिणाम तो नहीं देता है परंतु अमूमन शुभ रहेगा। सूर्य के वृश्चिक में पहुंचने से पहले ही इस राशि में शनि व बुध विराजमान हैं और अब सूर्य के पहुंचते ही त्रिग्रही योग बनेगा जो अनुकूल नहीं है। यह संक्राति स्त्री वर्ग हेतु फायदेमंद रहेगी। देश की राजनीति हेतु प्रतिकूल रहेगी। राजनीति में काफी उतार-चढ़ाव आएंगे। इन दौरान आतंकी घटनाओं की भी संभावना है। मौसम में तेजी से बदलाव होगा। देश दुनिया में तूफान की आशंका रहेगी। वृश्चिक संक्रांति पुण्यकाल प्रातः 06:48 से दिन 12:05 तक रहेगा। संक्रांति प्रारम्भ काल प्रातः 06:29 पर होगा। आइए जानते हैं की इस गोचर का द्वादश राशियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
ReplyDeleteमेष: गोचर अनुकूल फल नहीं देगा। सम्बन्धियों से मनमुटाव होगा। सेहत का ख्याल रखें। अनैतिक कार्य से न जुड़ें। मान सम्मान पर भी आंच आ सकती है।
वृषभ: अधिक मेहनत करने से लाभ मिल सकता है। साझेदारी में समझदारी की जरुरत है। जीवनसाथी के स्वास्थ्य का ख्याल रखें। सेहत पर अधिक ध्यान दें।
मिथुन: लाभदायक समाचार मिलेंगे। आत्मविश्वास बनाए रखें। कार्यों में सफल होंगे। परेशानियों का समाधान होगा। शत्रु पराजित होंगे। प्रतिष्ठा की प्राप्ति होगी।
कर्क: उल्लास व उत्साह का अनुभव होगा। स्वभाव में उग्रता रह सकती है। प्रेम संबंध हेतु समय अनुकूल है। मन में शंका रहेगी। संदेह रिश्तों में खटास लाएगा।
सिंह: स्वयं को तनाव मुक्त रखें। गृहस्थी को लेकर चिंता रहेगी। पारिवारिक क्लेश से तनाव रहेगा। कड़ी मेहनत करनी पड़ेगी। परिश्रम से थकान महसूस होगी।
कन्या: कम दूरी की यात्राएं करनी पड़ेंगी। प्रियजनों से सहयोग मिलेगा। आत्मनिर्भरता में कमी आएगी। रिश्तों को बेहतर बनाने से पारिवारिक प्रसन्नता मिलेगी।
तुला: आर्थिक अड़चने आएंगी। आर्थिक मामलों में लापरवाही से बचें। व्यर्थ के खर्चों पर नियंत्रण रखें। पारिवारिक मामले परेशान करेंगे। सोच समझकर ही बोलें।
वृश्चिक: गोचर सेहत हेतु प्रतिकूल है। जीवन हेतु नजरीया सकारात्मक रहेगा। आत्मविश्वास में बढ़ोतरी होगी। मान-सम्मान बढ़ेगा। क्रोध पर नियंत्रण जरुरी है।
धनु: दूर की यात्रा करनी पड़ेगी। परंतु यात्राओं से लाभ कम मिलेगा। उन्माद में आकर कोई कार्य न करें। पैसे कमाने के लिए अनैतिक कार्य में लिप्त न हों।
मकर: गोचर अच्छे परिणाम देगा। कार्य का शुभफल मिलेगा। प्रियजन मददगार सिद्ध होंगे। महत्वकांक्षाएं पूरी होंगी। समझौतों से लाभ मिलेगा। आय वृद्धि होगी।
कुंभ: कार्यक्षमता सफलता दिलाएगी। अनैतिक कार्यों से मान सम्मान को हानि पहुंचेगी। कार्य अधिकता के कारण व्यस्त रहेंगे। व्यापार में सफलता मिलेगी।
मीन: सेहत का ध्यान रखें। यात्रा करने से बचें। उच्चाधिकारी कार्य से खुश होंगे। माता पिता की सेहत का भी ख्याल रखें। पिता से सम्बन्ध अच्छे बनाए रखें।
*शुक्र का राशि परिवर्तन करेगा जातकों को मालामाल, साथ ही बढ़ाएगा ऐश्वर्य और प्यार! पढ़ें आपकी राशि पर क्या होगा गोचर का प्रभाव !*
ReplyDeleteवैदिक ज्योतिष में शुक्र ग्रह को सुंदरता, संगीत, नृत्य व अन्य प्रकार की कलात्मक प्रतिभा, काम-वासना एवं सभी प्रकार के भौतिक सुखों का कारक माना जाता है। यह वृषभ और तुला राशि का स्वामी है। जो मीन राशि में उच्च का जबकि कन्या राशि में यह नीच का होता है। बुध और शनि ग्रह शुक्र राशि के मित्र ग्रह माने जाते हैं। जबकि सूर्य ग्रह और चंद्र ग्रह इसके शत्रु ग्रह हैं। कोई भी ग्रह अपने शत्रु ग्रह के साथ कमज़ोर अवस्था में होता है। जबकि मित्र ग्रहों के साथ युति करने पर बली होता है। वहीं नक्षत्रों में शुक्र ग्रह को भरणी, पूर्वा फाल्गुनी और पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र का स्वामित्व प्राप्त है।
जब किसी जातक की कुंडली में शुक्र उसके दूसरे, तीसरे, सातवें और बारहवें भाव में होता है तो यह बली होकर अच्छे परिणाम देता है। वहीं इसके विपरीत अगर यह छठे या फिर आठवें भाव में हो तो यह कमज़ोर होता है और इसके नकारात्मक प्रभाव जातकों के जीवन पर पड़ते हैं। अन्य भावों पर इसके प्रभाव सामान्य रूप से पड़ते हैं। शुक्र के अच्छे प्रभाव के कारण जातक को जीवन में सांसारिक सुखों की प्राप्ति होती है। व्यक्ति जीवन में प्रसिद्धि को प्राप्त करता है। उसके अंदर कलात्मक प्रतिभा का विकास होता है और उसके व्यक्तित्व में गजब का आकर्षण होता है जो विपरीत लिंग के व्यक्ति को अपनी तरफ़ खींचता है। शुक्र के अच्छे प्रभाव से व्यक्ति की सेक्स लाइफ़ अच्छी होती है। लेकिन अगर किसी जातक की कुंडली में शुक्र ग्रह कमज़ोर या फिर पीड़ित हो तो इसके दुष्प्रभाव जातक के जीवन पर पड़ते हैं। इसके फलस्वरुप कील मुहांसों की समस्या, नपुंसकता, अपच, भूख ना लगना तथा त्वचा संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।
*शुक्र के दुष्प्रभावों से ऐसे करें बचाव*
जातक ज्योतिष उपायों के द्वारा न केवल शुक्र ग्रह के दुष्प्रभावों से बच सकते हैं, बल्कि इन महा उपायों से शुक्र ग्रह को मजबूत भी बनाया जा सकता है। शुक्र ग्रह की शांति के लिए शुक्र यंत्रको पूर्ण विधि विधान से स्थापित कर उसकी आराधना करने से शुक्र ग्रह मजबूत होता है। इसके साथ ही रत्नों में अमेरिकन डायमंड शुक्र ग्रह की मजबूती के लिए धारण किया जाता है। इसके अलावा शुभ फल पाने के लिए छः मुखी रुद्राक्ष, तेरह मुखी रुद्राक्ष या फिर अरंड मूल की जड़ी भी धारण कर जातक हर समस्या का निवारण कर सकते हैं।
*गोचर का समय*
22 मार्च 2019, शुक्रवार को शुक्र ग्रह प्रातः 03:34 बजे कुंभ राशि में गोचर करेगा और 16 अप्रैल 2019, मंगलवार सुबह 00:55 बजे तक इसी राशि में स्थित रहेगा, जिसके चलते शुक्र के कुंभ राशि में होने वाले गोचर का सभी राशियों पर असर होगा।
*लोकसभा चुनाव और आईपीएल 2019 में शुक्र के गोचर का प्रभाव*
शुक्र के गोचर का प्रभाव इस अवधि में मनुष्य जीवन में होने वाली घटनाओं पर पड़ेगा। चूँकि इस दौरान भारत में आईपीएल 2019 और लोकसभा चुनाव 2019 का आयोजन होगा और निश्चित रूप से शुक्र ग्रह के इस गोचर का प्रभाव भी इन दोनों महत्वपूर्ण घटनाओं पर भी दिखाई देगा। स्वतंत्र भारत की कुंडली के अनुसार देश की लग्न राशि वृषभ है। शुक्र का गोचर वृषभ राशि से दशम भाव में हो रहा है। ऐसे में शुक्र ग्रह के प्रभाव से सत्ताधारी पार्टी को बल मिलेगा और राजनितिक पार्टियों में महिलावादी विचार रखने वाले उम्मीदवारों को फायदा होगा। जहाँ तक आईपीएल 2019 का सवाल है तो शुक्र के प्रभाव से आईपीएल 2019 पहले के मुकाबले ज्यादा हिट रहने वाला है। क्योंकि शुक्र का गोचर कुंभ राशि में हो रहा है जो कि काल पुरुष कुंडली के अनुसार ग्यारहवें भाव की राशि है। ये योग गैजेट, मनोरंजन, सुख-सुविधाओं जैसी चीज़ों में वृद्धि को दर्शाता है।
*यह राशिफल चंद्र राशि पर आधारित है।*
मेष राशि
शुक्र देव आपकी राशि के लिए द्वितीय और सप्तम भाव के स्वामी हैं और आपके 11वें भाव में गोचर कर रहे हैं। इस गोचर के दौरान आपको अचानक अप्रत्याशित आय के योग बनेंगे और आप अपने जीवन में कोई नई उपलब्धि हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ेंगे। शुक्र ग्रह का ये गोचर आपकी महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने में पूरा सहयोग करेगा तथा आपकी लव लाइफ भी बेहद खुशनुमा रहेगी। आपके रिश्ते में प्यार और रोमांस की वृद्धि होगी तथा आपका प्रेम परवान चढ़ेगा। समाज में आपके मान सम्मान में वृद्धि होगी और आपकी तरक्की होगी तथा घर पर समृद्धि और खुशहाली आएगी। इस गोचर के दौरान आपको अपने प्रियतम के साथ बढ़िया वक्त बिताने का पूरा पूरा मौका मिलेगा और इससे आपके बीच की दूरियाँ कम होंगी और नज़दीकियों में वृद्धि होगी। इस गोचर के परिणाम स्वरुप आपको अपने भाई बहनों और मित्रों का पूरा सहयोग प्राप्त होगा और ये गोचर आपकी राश