Friday, 18 April 2014

“हमें नफरत हैं ऐसे बड़े लोगों से जो एसी में सफर करते हैं और रेलवे के कम्बल और तौलिया चुरा कर ले जाते हैं”



यह है श्यामलाल यादव। यह अमरकंटक एक्सप्रेस में एसी कोच की देखरेख करते हैं। गाड़ी में सफर करते हुए थोड़े दुखी दिखे तो मैंने कारण पूछा। श्यामलाल ने बताया कि गाड़ी की एसी कोच में सफर करने वाले सभ्रांत लोग कम्बल, नेपकिन और सफ़ेद चादरे चुराकर ले जाते हैं, जिसके कारण हर महीने इन्हें मिलने वाले छह हजार रुपए के वेतन में से ठेकेदार पंद्रह सौ रुपए काट लेता है। श्याम लाल दुर्ग के पास एक गाँव में रहते हैं, बहुत गरीब परिवार है। चार हजार में परिवार का गुज़ारा कैसे होता होगा, यह सोचना ही मुश्किल है।
एक सवाल बड़ी मासूमियत से श्यामलाल यादव ने भी पूछा "आप लोग जो एक-दो हजार का टिकिट खरीदते हैं एसी कोच में सफर करने के लिए, आप रेलवे के कम्बल और नेपकिन क्यों उठा ले जाते है। अगर यहीं आपका दांत मांजने का ब्रश भी आप बेसिन पर भूल जाते हैं, तो चोरी का इल्जाम हम जैसे गरीबों पर लग जाता है। रात को आप लोग हमें रूपये देकर सिगरेट और दारु माँगते है। कैसे-कैसे बड़े लोग एसी कोच में आते है जिनकी नीयत इतनी खराब होती है कि रेलवे के नेपकिन, कम्बल और तौलिया तक चुरा ले जाते हैं। यहीं नहीं जितनी गन्दगी आप लोग गाड़ी में करके जाते हैं, उतनी तो हम भी नहीं करते भले ही हम झोपड़ियों में रहते हों”।
श्यामलाल आगे बोलता रहा “हमें आपके जैसे बड़े लोगों से नफ़रत है जो देश चलाने का काम करते है, एसी में सफर करते हैं...., गरीबों की हाय लेकर और रेलवे के नेपकिन चुराकर कौन सा मैदान जीत लोगे आप लोग....। इस तरह की चोरियां करते हुए शर्म भी नहीं आती आपको”।

देवास, मध्य प्रदेश से संदीप नाइक


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