जब मैंने दिए गए नंबर पर फोन करके चावला जी से बात की और उनको बताया कि मैं लखनऊ से हूं, सिन्धी हूं और फर्स्ट टाइम वोटर हूं, आप क्या राय देते हैं कि मुझे किसे वोट देना चाहिए तो उन्होंने मुझसे कहा “बेटा हमारा सिन्धी समाज बटा हुआ है। यहां एक ही परिवार के लोग अलग अलग पार्टियों को वोट देते हैं इसलिए हमारे वोट किसी पार्टी को जिताने या हराने वाले नहीं होते बल्कि बेकार हो जाते हैं। किसी पार्टी की नज़र में हमारी कोई वैल्यू नहीं है। अब तुम मुसलमानों को देखो, सारे लोग मिलकर एक पार्टी को वोट देते हैं तो उनकी वैल्यू है। इस समय बीजेपी के राजनाथ सिंह तक उनसे माफी मांग रहे हैं, उनके आगे हाथ जोड़े खड़े हैं ताकि उनके वोटों को प्रभावित कर सके, लेकिन सिंधी समाज के वोट चूंकि बटे हुए, इसलिए किसी पार्टी को हमारी चिन्ता नहीं, हमारे वोट हार या जीत के निर्धारक नहीं होते। इसलिए बेहतर होगा अगर हम हर एरिया के हिसाब से अपने आपको संगठित करें और किसी एक पार्टी, चाहें वो कोई भी हो, को संयुक्त रूप से वोट दें ताकि हमारे वोटों की कीमत हो और पार्टियां भी सिन्धी समाज के वोटों की कीमत पहचानें।”
जब मैंने उनसे यह पूछा कि आपको क्या लगता है किस पार्टी को वोट दिया जाना चाहिए तो उन्होंने मुझसे कहा “देखो कांग्रेस बहुत सारे वादे कर रही है, लेकिन सच्चाई यह है कि सरकार के पास एक भी वादा पूरा करने के लिए बिल्कुल भी पैसा नहीं है। सरकार पूरी तरह से खोखली हो चुकी है, मुझे तो लगता है शायद मई के महीने में सरकारी कर्मचारियों की तन्ख्वाह तक देना सरकार के लिए भारी होगा। इसलिए उनके वादों में तो सच्चाई नहीं। लेकिन बीजेपी में भी मोदी अच्छा नेता नहीं है, उससे कहीं ज्यादा अच्छे नेता आडवाणी जी और राजनाथ सिंह जी है और आप की हालत हम सब दिल्ली में देख ही चुके हैं”। और आखिरी में मैं किसे वोट दूं इसका फैसला उन्होंने मुझपर छोड़ते हुए कहा कि यह तुम्हारा फैसला है कि तुम किसे वोट दो लेकिन मैं केवल इतना कहना चाहता हूं कि जिस भी पार्टी को वोट दो, सब लोग मिलकर वोट देना जिससे आपके वोट बेकार ना जाएं।
चित्रलेखा अग्रवाल

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