आपकी जिंदगी की सबसे बड़ी परेशानी क्या है?
देखिए मेरी सबसे बड़ी परेशानी यह है कि फिलहाल मेरा दोस्त स्कूल में
हाउस कैप्टन बन गया है। पहले एक दूसरी लड़की हाउस कैप्टन बन रही थी जिससे मेरी
लड़ाई हो चुकी थी तब भी मुझे खराब लग रहा था लेकिन अब जब मेरा दोस्त कैप्टन बन गया
है तब बहुत ज्यादा खराब लग रहा है। अब मुझे समझ में आ गया है कि दोस्त फेल हो जाए
तो दुख होता है लेकिन दोस्त आपसे आगे निकल जाए तो बहुत ज्यादा दुख होता है। दोस्ती
में दरार आ जाती है ऐसा कभी नहीं होना चाहिए।
आजकल की पढ़ाई के बारे में आपका क्या कहना है?
पढ़ाई इतनी ज्यादा बिल्कुल नहीं होनी चाहिए। टीचर्स को समझना
चाहिए कि हम बच्चे हैं, कम्पयूटर नहीं, जो इतना सारा कुछ पढ़ने के लिए लगा रखा है।
ना हमें खेलने को समय मिलता है ना एक दूसरे से मिलने जुलने का, जबकि सोशल होना
कितना ज़रूरी है, खेलना भी हैल्थ के लिए कितना ज़रूरी है। यह बातें टीचर्स खुद ही पढ़ाते
हैं लेकिन उन्हें लागू करने के लिए हमें टाइम ही नहीं देते। पूरे समय बस पढ़ाई,
पढ़ाई और पढ़ाई..।
आपके हिसाब से टीचर्स को पढ़ाई को और रोचक बनाने के लिए क्या करना
चाहिए?
उन्हें हर हफ्ते एक पीरियड बातों के लिए देना चाहिए कि उस पीरियड में
बच्चे खूब बातें करें। जी भर के बातें करें। इससे उनका मन पढ़ाई में खूब लगेगा और
वो बार बार हर पीरियड में बात करने का मौका भी नहीं ढूंढेंगे। और दूसरे हर टीचर को
स्टूडेन्ट्स को बता देना चाहिए कि बच्चे उन्हें और किस नाम से पुकार सकते हैं। वो
केवल एक नाम होना चाहिए...
एक नाम मतलब?
अब देखो बच्चे टीचर को उनके नाम से तो
बुलाते नहीं हैं, उनका नया नामकरण ज़रूर करते हैं। यह तो आपको मालूम ही होगा। जैसे
हमारे यहां एक टीचर हैं, रजनी मैम, अब कुछ बच्चे उन्हें रज्जो कहते हैं, कुछ
रजनीकांत कहते हैं, कुछ रजनीगंगनम कहते हैं... अब अलग अलग नाम हैं तो अक्सर बच्चों
में लड़ाई हो जाती है कि मेरे नाम से बोलो, मेरा नाम ज्यादा अच्छा है वगैरह,
वगैरह..। अब अगर टीचर यह रूल लागू कर देगी कि उन्हें एक ही नाम से बुलाया जा सकता
है तो बच्चे कन्फ्यूज नहीं होंगे और ना लड़ेंगे। है कि नहीं।
(पॉइन्ट) और क्या करना चाहिए?
और टीचर को बच्चों के लिए पॉपकॉर्न लाने चाहिए। क्योंकि जब हम लड़ते
हैं और अचानक टीचर आ जाती है तो हम कहते हैं, चुप कर के बैठो अब शो शुरू होने वाला
है... और उस वक्त हम चुप होकर सीधे तो बैठ जाते हैं पर हमारे पास खाने के लिए
पॉपकॉर्न तो होते नहीं। अब अगर टीचर हमें पॉपकॉर्न देगी तो हम कितने ध्यान से
पढ़ाई करेंगे। मूंह में पॉपकॉर्न होंगे तो कोई बात भी नहीं करेगा। और बिल्कुल जैसे
मूवी देखते हैं, शांति से, ध्यान लगाकर हम टीचर की बात सुनेंगे। (इतनी
महत्वपूर्ण बात तो हम सोचते ही नहीं हैं..)
आप मम्मी-पापा से क्या उम्मीद रखती हैं? क्या आपको लगता है कि उनको भी और अच्छा
होना चाहिए। उनमें भी बदलाव ज़रूरी हैं?
हां बिल्कुल होना चाहिए। अच्छे होने के लिए सबसे पहले तो मम्मी-पापा
को मुझे एक एन्ड्रॉयड फोन दिलाना चाहिए, क्योंकि मेरे सारे दोस्तों के पास
एन्ड्रॉयड फोन है, बस मेरे पास नहीं है। तो समानता की भावना नहीं आती। और मम्मी पापा को हमें हर फिल्म दिखानी चाहिए
ताकि हमारे फ्रेन्ड्स जब फिल्मों के बारे में बातें करें तो हम भी अपनी राय रख
सकें, उनसे अलग ना महसूस करें। जो फिल्में देखें सारे बच्चे देखें जिससे कि सभी
उसके बारे में बातें कर सकें।
अच्छा मुझे यह बताईए कि आपको अपने देश में क्या खराब लगता है? आप देश में क्या
बदलाव लाना चाहती हैं? अगर आपको पावर मिले तो क्या बदलेंगी?
हमारे देश में तो सबसे ज्यादा गंदगी की परेशानी है। देश में हर जगह
इतनी ज्यादा गंदगी है कि पूछिए मत। मुझे अगर पावर मिली तो मैं देश में गंदगी
फैलाने वालों को जेल में डाल दूंगी। कैसे लोग है, इतने बड़े होते हैं, पर सफाई
नहीं रख सकते, कहीं भी कूड़ा फेंक देते हैं। उनसे ज्यादा सफाई तो हम स्कूल के
स्टूडेन्ट्स रखते हैं। हम अपना स्कूल साफ रखते हैं और बड़े लोग सड़के, गलियां और
देश साफ नहीं रख सकते। इसके अलावा मैं सारे पैरेन्ट्स को बोलूंगी कि अपने बच्चों
को पूरी फ्रीडम दें। हर बच्चे को जो वो करना चाहता है करने दिया जाए, उन पर
जबरदस्ती के नियम मत थोपिए, उससे हमें बड़ी परेशानी होती है। जैसे आपको हमें रोज
कम से कम एक घंटे तक फेसबुक करने की इजाज़त देनी चाहिए। और भी अगर हम कहीं जाना
चाहते हैं, या कुछ करना चाहते हैं, किसी से मिलना चाहते हैं तो मिलने देना चाहिए।
क्योंकि अगर आप हमें नहीं करने देंगे तो वो काम हम छुप छुप के करेंगे तब भी आपको
परेशानी होगी। आप लोगों को हमारी बातें सुननी चाहिए, हमसे बातें करनी चाहिए। एक
तरफ तो कहते हैं कि हम देश का भविष्य हैं और दूसरी तरफ आप हमें बिल्कुल निगलेक्ट
कर देते हैं, बस बच्चा समझते रहते हैं, ऐसा नहीं होना चाहिए।
अच्छा क्या आप राजनीति के बारे में जानती हैं, उसमें दिलचस्पी लेती
हैं?
पापा पूरे समय न्यूज़ सुनते रहते हैं। टीवी पर कभी एक नेता किसी के
बारे में कुछ बोलता है तो कभी कोई दूसरा किसी के बारे में कुछ बोलता है। बुराई सुन
सुन के कान पक गए। कितना टाइम है इनके पास, हमेशा एक दूसरे के बारे में ही बातें
करते रहते हैं, ढूंढ कर एक दूसरे की बुराई निकालते रहते हैं। इसलिए मुझे नेता
अच्छे नहीं लगते। अरे भई अपने बारे में सोचो, अपने बारे में बात करों, दूसरों के
बारे में बात करोगे तो बेकार में वो अपने आपको इम्पोर्टेन्ट समझने लगेंगे। नेताओं
को इतनी छोटी सी बात समझ में नहीं आती। यह तो हमसे सीखना चाहिए। हम सिर्फ अपने
फैशन, अपने स्टायल, अपनी पढ़ाई, अपनी अच्छाई की बातें करते हैं, किसी और के बारे
में सोचने का टाइम किसके पास है। वैसे मुझे यह भी लगता है कि हमें तो एक क्लास पास
करनी है, उसमें इतनी पढ़ाई होती है कि अपने लिए समय नहीं मिलता और नेताओं को तो
राज्य संभालना होता है, देश संभालना होता है, फिर भी उन्हें फालतू की बातें करने
का टाइम मिल जाता है...। उन्हें सबसे पहले तो डिस्पिलिन सिखाना चाहिए और कुछ
मैनर्स भी।
अगर आपको राजनीति में लाया जाए, तो क्या करेंगी?
मैं..., मैं सबसे पहले एक एप्पल वूमन पार्टी बनाऊंगी। और वो पूरी तरह
महिलाओं की पार्टी होगी।
पर एप्पल वूमन पार्टी क्यों...? मतलब आप अपनी पार्टी का नाम एप्पल वूमन
पार्टी क्यों रखना चाहती हैं?
देखिए, एक ‘आम’ आदमी पार्टी तो हैं ना..., और वो आदमियों की पार्टी है, तो इसी तरह
एक ‘एप्पल’ वूमन पार्टी भी
होनी चाहिए जो केवल महिलाओं की पार्टी हो और महिलाओं के हित की बातें करें और इसी
के लिए काम करे। उन्होंने अपनी पार्टी का नाम ‘आम’ रखा है तो हम ‘एप्पल’ रखेंगे क्योंकि जिस तरह आम बहुत टेस्टी
होता है उसी तरह एप्पल भी बहुत अच्छा फल है और बीमारियां दूर करता है।
आप अपनी तरफ से कोई संदेश
देना चाहेंगी?
मैं सारे मम्मी-पापा से यह कहना चाहती हूं कि पैसा हाथ का मैल होता
है। उसे कभी भी हाथ में नहीं लगने देना चाहिए। उस मैल के कारण कभी भी बच्चों को
परेशान नहीं करना चाहिए और उनकी हर ख्वाहिश पूरी करनी चाहिए।
चित्रलेखा अग्रवाल
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