Thursday, 3 April 2014

भगवान राम को छोड़ प्रभू यीशू की शरण में चले भारतीय...

भारतीय तेज़ी से अपना रहे हैं ईसाई धर्म...जानिए कुछ महत्वपूर्ण तथ्य


-   भारत में प्रतिदिन 5,000 लोग ईसाई धर्म को अपनाते हैं। मतलब प्रत्येक 17.28 सेकंड में एक व्यक्ति।
- मिशनरी के कामों पर हर साल 145 बिलियन अमेरीकी डॉलर का खर्च आता है। 
- हर साल दुनिया भर के चर्च, धर्म परिवर्तन के लिए 3,000 भाषाओँ में 180 धार्मिक विषयों के बारे में शोध करने के लिए 1.1 बिलियन अमेरीकी डॉलर का खर्च करते हैं। 

- दुनियाभर के पुस्तकालयों में 500 अलग भाषाओँ में मिशनरी साहित्य की 175,000 पुस्तकें मौज़ूद हैं और उनमें हर साल वृद्धि हो रही है। 
- प्रत्येक सामूहिक ईसाई धर्म परिवर्तन के लिए औसतन 330,000 डॉलर का खर्च आता है। 
- वर्ष 1500 में 3 मिलियन की संख्या से बढ़कर मिशनरी गतिविधियों में हिस्सा लेने वाले ईसाईयों की संख्या दुनियाभर में 648 मिलियन हो चुकी है, इनमें से 54% लोग अन्य धर्मों के हैं। इन्हें इन्हीं के देशों में मिशनरी द्वारा ईसाई धर्म में परिवर्तित करके धार्मिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। 
- समृद्ध विकसित देश के लोगों का धर्म परिवर्तन करने में मिशनरीज का खर्च भारत जैसे विकासशील देश की तुलना में 700 गुना अधिक है। इसी वजह से विकासशील देश जहां गरीबों और पिछड़े लोगों की संख्या ज़्यादा है, मिशनरीज के पसंदीदा कार्य क्षेत्र है।
- मिशनरीज की शिक्षाओं को मानते हुए हर रोज़ लगभग 10,000 चीनी, ईसाई धर्म अपनाते हैं। 
- हर साल 6 मिलियन अफ्रीकन ईसाई धर्म अपनाते हैं।    
- वर्ष 1972 में भारत में 26 मिशनरी एजेंसियां थीं जबकि वर्ष 1997 तक इनकी संख्या 200 तक पहुंच चुकी थी।
-हांलाकि इस मामले में ताज़ा आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं लेकिन भारत में आईसीएसई पैटर्न से शिक्षा देने वाले काफी सारे कॉन्वेन्ट स्कूल ईसाई मिशनरी से जुड़े हुए हैं और ईसाई धर्म के प्रचार और प्रसार में सक्रिय हैं। 
-आज़ादी के समय मिज़ोरम, मेघालय और नागालैंड की आबादी हिन्दू बहुल थी, जो कि अब 60 साल में ईसाई बहुसंख्यक बन चुकी है और हिन्दू वहां अल्पसंख्यक बन कर रह गए हैं। 

-केन्द्र सरकार द्वारा जारी की गई एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में कार्यरत विभिन्न समाज सेवी संस्थाओं को सन् 2007-08 के दौरान लगभग 10,000 करोड़ का अनुदान विदेशों से प्राप्त हुआ है। पैसा प्राप्त करने वाले शीर्ष 10 संगठनों में से 8 ईसाई संगठन हैं। दानदाताओं में शीर्ष देश हैं अमेरिका, ब्रिटेन व जर्मनी जबिक सबसे अधिक पैसा पाने वाले संगठन हैं वर्ल्ड विजन इंडिया, रुरल डेवलपमेण्ट ट्रस्ट अनन्तपुर एवं बिलीवर्स चर्च केरल जो किसी ना किसी तरह से धर्मातंरण की गतिविधियों में लगे हुए हैं।

निधि रावत

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