Wednesday, 30 April 2014

हिंद प्रहरी संवाददाता द्वारा दूतावास व विदेश मंत्रालय में फोन लगाने पर जवाब मिला कि अधिकारियों को इन मामलों की जानकारी नहीं... एक दूसरे पर जानकारी देने का काम टालते रहे जिम्मेदार अधिकारी



इस जानकारी के आधार पर हमने अबू धाबी स्थित भारतीय दूतावास से बात करने का प्रयास किया तो भारतीय राजदूत के कार्यालय में जवाब मिला कि “इस तरह की कोई भी जानकारी उनके पास नही है, और अगर ऐसी कोई जानकारी हमारे पास है तो उनको भेज दें”।

जब दिल्ली स्थित हमारी संवाददाता सारिका सिंह ने भारतीय विदेश मंत्रालय से इस संबंध में जानकारी प्राप्त के लिए संपर्क किया तो संपर्क तंत्र का जाल ही बन गया। आरंभ में फोन करने पर सारिका को बताया गया कि आपको इस बारे में सही जानकारी चाहिए तो प्रोटेक्टर जनरल ऑफ़ एमिग्रेंट्स आर बोहरिल को फोन करें और उनका नम्बर दे दिया गया।
 श्रीमान बोहरिल को फोन करने पर उन्होंने इस विषय को बेहद गंभीर विषय बताया और साथ ही यह कह दिया कि इस विषय से हमारा कोई सरोकार नहीं है यह तो प्रवासी भारतीयों के लिए काम करने वाले दूतावासों का विषय है, और अगर हम और जानकारी प्राप्त करने के इच्छुक हैं तो प्रेस इनफार्मेशन ऑफ़ ब्यूरों के उप-निदेशक सुशांत महापात्रा से बात करें और उनका दूरभाष दे दिया। महापात्रा जी को कई मर्तबा फोन करने पर एक ही जवाब प्राप्त हुआ कि साहब बैठे नही हैं। 
परेशान होकर सारिका ने वापस बोहरिल जी को फोन किया तो इस बार उन्होनें विदेश मंत्री के उप-सचिव एमसी पांडे जी का दूरभाष दे दिया। पांडे जी को फोन करने पर उन्होने इस विषय पर बेहद दुख और पीड़ा दर्शाते हुए बताया कि हम इस मामले पर काम नहीं कर रहे हैं, अरब देशों में स्थित भारतीय दूतावासों द्वारा प्रवासी भारतीयों की भारत वापसी सुनिश्चित करने के लिए मिशन चलाया जा रहा है, वो ही ये सब बता पायेंगे, हम कुछ बता पाने की स्थिति में नही हैं, लेकिन क्षितिज मोहन इस बारे में आपको जानकारी दे सकते हैं तो उनका नम्बर ले लीजिए और जब सारिका ने बड़ी उम्मीदों के साथ क्षितिज जी को फोन लगाया तो शायद वो भी बैठना भूल गए थे। 
खैर सारिका ने सोचा शायद बोहरिल जी ही एक बार फिर कोई नया नम्बर दे पाएं तो वापस उन्हे फोन किया। इस बार उनके पीए ने फोन उठाया, सारिका की पूरी व्यथा सुनने के बाद उसने खेद जताया। सारिका ने कहा कि ये मसला आपके विभाग का है और जब मैं एक पत्रकार होकर कोई जानकारी नही जुटा पा रही हूं तो परेशान परिवारों को इतने फोन नम्बर भी नही पता, उनका क्या हाल होगा। शायद इस बात से पीए साहब नाखुश हुए और फौरन जवाब दिया कि “मैडम अगर हम सवाल जवाब करेंगे तो काम कौन करेगा”, इसके बाद फोन रख दिया गया। और हमने मान लिया कि वाकई में कोई जवाब नहीं है... न तो पीड़ित परिवारों को देने के लिए, न ही हमारी अफसरशाही का।

अब एक महत्वपूर्ण सवाल जब एक पत्रकार होते हुए भी हमारे संवाददाता को सही जानकारी नहीं मिली तो आप सोच सकते हैं कि आम आदमी का क्या हाल होगा जिसके पास सही नबंर और किससे सम्पर्क करना है, इसकी जानकारी तक नहीं होती
निधि रावत

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