कुछ दिन पहले एक काम के सिलसिले में मुझे सिडनी के पैरामैटा इलाके में जाना पड़ा। यह इलाका भारत, लेबनान, पाकिस्तान, अफगान, कोरिया और उनके आस पास के देशों से आए लोगों की रिहाईश माना जाता है। अपना काम करने के बाद मैं थोड़ी देर के लिए पार्क में बेंच पर बैठ गई। दो मिनट में ही एक महिला और पुरुष (फ्रैंक और रुथ) मेरे पास आए और मुझे एक कागज़ थमा दिया।
उस पर सबसे उपर लिखे ‘बाईबल सेमिनार’ को पढ़कर मुझे कार्यक्रम के बारे में जानने की उत्सुकता हुई। मैने उन श्रीमान एवं श्रीमती जी से इस बारे में जानकारी लेनी चाही तो उनकी बातें मुझे कुछ अजीब सी लगीं, जैसे- उन्होंने मुझे कहा चर्च में जरुर आओ, वहां सब मुफ्त होता है। ईसाई होने के बड़े फायदे हैं... आदि।
मैंने उनसे कहा मैं उनकी बात समझ नही पा रही हूं। तो उन्होने मुझे बताया कि आप चर्च में आओ वहां बाईबल में लिखी कई सारी अच्छी बाते पता चलेंगी। मैने पूछा जैसे कोई बात अगर उदाहरण के तौर पर आप मुझे बता सकें तो उन्होने मेरे प्रश्न के जवाब में उल्टा मुझसे प्रश्न किया कि “तुम्हारे मन में पाप है कि नहीं?”… मुझे थोड़ा अटपटा लगा, मैने तत्काल कहा “नहीं जी, मैं तो खुद को बहुत ही नेक और ईमानदार समझती हूं, मुझमें कोई पाप नहीं”। वो बोले ऐसा नहीं हो सकता, गॉड ने सबके मन में पाप डाला है। मैंने कहा, तो?, वो बोले उस पाप को दूर करने के लिए तुमको जीजस की शरण में आना होगा। मैंने कहा लेकिन ऐसा क्यों? मेरे धर्म में भी भगवान हैं, वो मेरे पाप दूर कर लेंगे। तो वो मुझे समझाते हुए बताने लगे कि - ईश्वर ने हम सबको बनाया है और उसने हम सबके मन में पाप डाला है, और केवल जीजस ही एक ऐसे गॉड हैं जो हमारे पापों से हमको दूर ले जा सकते हैं। उनकी इस बात ने मेरी धार्मिक नींव को ही हिला डाला।
फिर वो पूछने लगे तुम्हारा भवगान तुमको क्या कहता है। मैने कहा मेरा भगवान कहता है अपने धर्म की पूजा करो और दूसरे धर्मो का आदर। इस पर वो मुझे बाईबल खोल कर दिखाने लगे - देखो यहां लिखा है कि ईसा मसीह आएगा और हमारे पापों को दूर करेगा, और भी न जाने क्या-क्या। पर मैंने भी उनसे बहस करने में कोई कोर कसर न रखी। घंटे भर तक वो बार-बार मेरे सामने हाथ हिलाते बोलते रहे कि “कोई दूसरा धर्म तुम्हारे पापों को दूर नही कर सकता, केवल जीजस ही तुम्को पाप से दूर करेगा - केवल जीजस”।
लम्बी बहस के बाद उन्होने मुझसे पूछा कि तुम कौन से भगवान की पूजा करती हो। मैने कहा गुस्से के भगवान लॉर्ड शिवा। यह सुनकर वो आपस में कोरियन में बात करने लगे और फिर मुझे स्ट्रांग हिंदू कह कर सिर हिलाते आगे बढ़ गए। और मैं सोचती रह गई कि ये मुझसे हार मान कर आगे बढ़ गए हैं या मुझे बेवकूफ समझ पर मुझ पर और समय बर्बाद नही करना चाहते।
फ्रैंक और रुथ की कही बातों ने एक बात साफ कर दी कि केवल भारत में ही नहीं और भारत के ही नहीं बल्कि अन्य देशों में और उनके नागरिकों को ईसाई बनाने का काम ज़ोरों पर हैं। ईसाई मिशनरी के प्रतिनिधि इतने प्रभावी ढंग और सुनियोजित तरीके से अपनी बात रखते हैं कि कोई भी इनकी बातों में आकर धर्म परिवर्तन के लिए तैयार हो सकता है।
निधि रावत
निधि रावत

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