Wednesday, 9 April 2014

आज का अखबार तुम - ख़बरों का बाज़ार तुम। कलम के पंखों पर उड़ता, छोटा सा संसार तुम। आज का अखबार तुम..

हिंद प्रहरी की अतिथि संपादक की तरफ से संदेश

निधि रावत, सप्ताह की संपादक 


हिंद प्रहरी के इस अंक में आप सबका स्वागत करते मुझे ऐसी ख़ुशी हो रही है जैसे किसी ने मेरे हाथ में कलम की तलवार नही बल्कि क्रांति की मशाल थमा दी हो। मैं निधि रावत न तो इस कार्यक्रम का हिस्सा हूं न ही संपादकों की सूची का कोई नाम। फिर भी मुझे इस अंक में शुभकामना सन्देश प्रेषित करने का गौरव दिया गया है। वो इसलिए- क्योंकि इस अखबार की नींव किसी सिद्ध ढांचे के अनुसार न होकर नई रचना है। जब चंडीगढ़ में इस अखबार की कल्पना की गई थी तो सबके मन में प्रश्न था और वहीं प्रश्न आज आप सब के मन में भी होगा, कि- हर पल की खबर रखने वाले टीवी और दैनिक अखबारों की कतार में क्या कभी कोई हमें अपने हाथ में लेना चाहेगा?

यकीन माने यह प्रश्न लम्बे समय तक हमारे मन में उथल पुथल मचाता रहा और इसका उत्तर आज आप के हाथों की कैद में है। हिंद प्रहरी खोए हुए मुद्दों, छिपे हुए तथ्यों और अनछुए सहज विषयों का अखबार बन चुका है। यहां मैने चुका हैका इस्तमाल इसलिए किया क्योंकि हिंद प्रहरी को सात अंक आप लोगों के बीच आ चुके हैं और एक टैस्ट इश्यू भी कुछ सीमित लोगों के बीच पहले से मौजूद हैं।

हमारी संपादकीय और कार्यकारी टीम उन लोगों का संगठन है जो पत्रकारिता को प्रतियोगिता की नजर से नही देखते। उनके लिए पत्रकारिता का अर्थ निश्चेत विषयों को जीवंत करना है और उनको लोगों के मध्य शालीनता से प्रेषित करना है। इसलिए इस अखबार की कार्यकारी टीम की कोई सीमा निश्चित नही की गई है। जैसे मैं आज आप सब के लिए संपादक की कलम हूं, वैसे ही आप कभी भी इस अखबार का अक्स बन सकते हैं। बिना शर्त और बिना किसी अनुभव के। बस आपको शब्दों के मंत्र और विषय की गहनता का बोध होना चाहिए। खुले शब्दों में कहें तो आपके लेखों और सुझावों का हिंद प्रहरी में इंतजार है। 

इस साप्ताहिक अखबार में हमारी कोशिश है कि हमारे लेख और विषय अच्छी और वास्तविक शोध की उपज हों। उनकी सत्यता प्रमाणित हो। देश दुनिया के मुद्दों से परिपूर्ण हिंद प्रहरी किसी प्रकार की सीमा पर आश्रित नही है। अगर हम हमारे देश के ज्वलंत मुद्दों की बात करेंगे, तो दुनिया भर के खोए लोगों को तलाशने का मुहिम भी चलायेंगे। अगर हम आपकी नजर से चूके विषयों को जगायेंगे, तो हम साधारण लोगों के बीच असाधारण बातों को भी ढूंढ कर लायेंगे। और ये सब वादों की किसी किताब के पन्ने नही बल्कि हिंद प्रहरी समूह का निश्चय है। ये बाते जो मैंने आज आपके समक्ष रखी हैं - ये सभी बाते जनसंचार का अभ्यास नहीं, हमारे दिमाग की दीमक है जिससे पीछा छुड़ाना हमारे बस में नहीं। तो मेरा आप सबसे निवेदन है कि हमें अपने सप्ताह का थोड़ा सा समय दें, ताकि हमें आपके बीच मौजूदगी का एहसास भी हो और अधिक से अधिक जानकारी को रोचक अंदाज में आपके समक्ष रखने के लिए प्रोत्साहन भी मिले।


अंत में मुझे सब्र के साथ पढ़ने के लिए धन्यवाद।   
  


       



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