वर्ष 2011 में सऊदी अरब के शहर जुबैल में मृत पाये गए एक भारतीय प्रवासी का शव अस्पताल और भारतीय दूतावास की रस्साकशी का शिकार होकर अभी भी जुबैल के एक मुर्दाघर में पड़ा हुआ है। अस्पताल उसके शव को वापस उसके घर भारत भेजने के लिए भारतीय दूतावास से ताबूत की मांग कर रहा है जबकि दूतावास का मत है कि मौत के स्पष्ट कारणों का पता चले बिना उस व्यक्ति के शव को उसके परिवार को नही सौंपा जा सकता है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार अज्ञात कातिलों ने उस व्यक्ति की हत्या की है।
इस बारे में भारतीय दूतावास का कहना है की पुलिस रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद ही उस व्यक्ति के शव को उसके घर भारत भेजने की कार्यवाही आरम्भ कर दी गई थी, लेकिन इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में अस्पताल द्वारा व्यक्ति के शव के लिए ताबूत की अनुपलब्धता के कारण देरी हुई।
स्वास्थ्य मंत्रालय को ताबूत की आपूर्ति करने वाले व्यक्ति का तीन साल का अनुबंध था जो कि समाप्त हो गया और अभी अप्रैल 2014 के दूसरे हफ्ते में उस अनुबंध का नवीकरण किया गया है। पूर्वी प्रांत के स्वास्थ्य मंत्रालय को प्रति सप्ताह 25 ताबूत उपलब्ध करने के निर्देश दिए गए हैं। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार एक बार ताबूत मिल जाए तब उस व्यक्ति के शरीर को वापस भारत भेजने की प्रक्रिया प्रारंभ की जाएगी।
हम आपको बता दें कि यह तो केवल दो मामले हैं लेकिन ऐसे हज़ारों मामले हैं जबकि किसी ना किसी वजह से भारतीय मजदूरों के शव अरब देशों में ही लावारिस पड़े हुए हैं और जिन्हें पूछने वाला कोई नहीं।
निधि रावत

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