विश्व के 6 ऐसे लोगों की दास्तान जिनके मर चुकने के कई वर्षों बाद तक भी लोगों को उनकी मौत का पता नहीं चला.., जिनके कंकाल में तब्दील हो चुके शरीर लम्बे अरसे बाद उनके घरों में मिले.....
कैसा दिल दहला देने वाला ख्याल है कि रिश्तों, दोस्तों और चाहने-मिलने वालों की इस दुनिया में अचानक कोई हमारा नाम भी लेने वाला न हो। ऐसी दुनिया ज़ेहन में उपजते ही दिल में ज़ोर का दर्द होने लगता है, चारों तरफ अंधेरा हो जाता है और इस तरह के ख्यालों को हम आम तौर पर पागलपन के दौरे का नाम देते हैं। क्योंकि ये संभव ही नही कि हम कभी दुनियादारी से दूर हो सकें। लेकिन ज़रा सोच के देखिए, जो तकलीफ हमें सिर्फ अकेलेपन का ख्याल से होने लगती है, वहीं तकलीफ इस दुनिया के कितने ही एकांकी जीवनों का सच है। दुनिया में ऐसे जाने कितने लोग हैं जो अपना जीवन अकेलेपन में गुज़ार रहे हैं। इस अंक में हम उन चंद बदकिस्मत लोगों की सच्ची दास्तान लेकर आए हैं, जिन्होंने अपनी मौत को भी जीवन की तरह एकांकी गुजारा और इंतजार किया कि शायद अपनी ही किसी गरज़ से कोई कभी उनको कब्र की मिट्टी तोहफे में देगा। लेकिन उनकी सुध किसी ने नहीं ली, सालों हो गए उन्हें मरे हुए और लोगों को पता ही नहीं चला कि वो मर चुके हैं। कब्र की मिट्टी की आस में कई शरीर मिट्टी हो गए तो कई की मिट्टी भी हवा में घुल गई:-
वर्ष-2008, क्रोएशिया
क्रोएशिया की हैडविका गोलिक, जो 42 साल तक मृत अवस्था में अपने टीवी के सामने बैठी रहीं
टीवी के सामने लम्बे समय तक बैठ के इंतजार करने के बाद आखिर कब्र में जाने का समय आ ही गया। हैडविगा गोलिक की उम्र उस समय 42 वर्ष थी जब उसने एक चाय के साथ टीवी का आनंद लेने का मन बनाया, पर न तो उसका टीवी कार्यक्रम ही कभी खत्म हुआ न ही चाय का वो प्याला। क्रोएशिया पुलिस के अनुसार हैडविगा के पड़ोसियों ने उन्हे आखरी बार 1966 में जीवित देखा था। लम्बे समय से उनके पड़ोसी ये समझते आ रहे हैं कि वो जगरेब के अपने घर को खाली करके जा चुकी है। शायद इसी लिए क्रोएशिया पुलिस उनके घर में घुस कर तथ्यों की छान बीन करने से चार दशकों तक बचती रही। पर आखिरकार मई 2008 में पुलिस को हैडविग के घर के मालिकाना अधिकार के मामले में घर में कदम डालने ही पड़े, जहां हैडविग का कंकाल 42 वर्षों से किसी की नजर का इंतजार करता पाया गया। पुलिस के अनुसार उनके घर के अंदर ऐसा महसूस हो रहा था जैसे कि लम्बे समय से वक्त वहां ठहरा हुआ हो। एक मुर्दा मातम और डरावनी खामोशी वहां छाई हुई थी और हैडविग की चाय का प्याला उनके बगल में वैसा ही रखा था जैसा उसे 42 साल पहले आखरी बार रखा गया होगा।
वर्ष-2006, लंदन
तीन सालों तक जायॅस का कंकाल दुनियाभर की खबरों का मजा लेता रहा
25 जनवरी, 2006 को उत्तरी लंदन की हाउसिंग एसोसिएशन को याद आया कि वुड ग्रीन में रहने वाली जॉयस ने पिछले लगभग तीन साल से किराया नही अदा किया है। तब उसके घर पर कब्जा करने की इच्छा से एसोसिएशन और पुलिस ने घर पर धावा जा बोला। पर कई घंटियों के बाद भी दरवाजे के आस पास कोई आहट नहीं हुई। लेकिन घर से आ रही धीमी आवाजें घर में किसी न किसी की मौजूदगी का एहसास कराती रहीं थी। तब परेशान होकर उन्होंने दरवाज़े को तोड़कर घर में घुसने का मन बना लिया।
और जब एसोसिएशन और पुलिस को घर का नज़ारा हुआ तो उन्हें मिला अपनी शिनाख्त के इंतजार का मजा लेता सोफे पर पसरा 38 वर्षीय जॉयस का कंकाल जिसकी नजरें ठीक सामने चल रहे टीवी पर टीकी हुई थीं जिस पर उस समय भी बीबीसी समाचार का कोई कार्यक्रम चल रहा था। पास ही कई खुले, अधखुले और बिन खुले क्रिसमस के उपहार पडे थे, किचन की सिंक बर्तनों के अम्बार से ढकी हुई थी, घर का प्रवेश द्वार बेतरतीबी से पड़ी डाक से भरा हुआ था लेकिन कहीं भी इंसानी सांस की कोई आहट नहीं थी। पूरे घर में बदबू आ रही थी।
पुलिस के अंदाज़े को सही माना जाए तो वर्ष 2003 के क्रिसमस का दिन जॉयस के जीवन का आखरी दिन था। जॉयस की जायज पहचान को साबित करने के लिए उनकी लाश पर कुछ भी शेष न था। इसके लिए फॉरेंसिक विशेषज्ञों को उनके ढांचे और उनकी वास्तविक तस्वीर के बीच मिलान करना पड़ा। शरीर के पूरी तरह नष्ट हो चुकने के कारण उनकी मौत के कारणों का पता नहीं लगाया जा सका।
पर छान-बीन में सबसे हैरानी की बात यह सामने आई की 80 और 90 के दशक में लंदन की संगीत से जुडी कई प्रमुख हस्तियों के बीच अच्छी तरह से जानी जाने वाली जायस को तीन वर्षों के दौरान किसी ने एक बार भी याद नही किया। और उनके घर से बदस्तूर सड़ांध आने के बावजूद मौत की खबर को आम होने में लम्बा अरसा लगा।
पुलिस के अंदाज़े को सही माना जाए तो वर्ष 2003 के क्रिसमस का दिन जॉयस के जीवन का आखरी दिन था। जॉयस की जायज पहचान को साबित करने के लिए उनकी लाश पर कुछ भी शेष न था। इसके लिए फॉरेंसिक विशेषज्ञों को उनके ढांचे और उनकी वास्तविक तस्वीर के बीच मिलान करना पड़ा। शरीर के पूरी तरह नष्ट हो चुकने के कारण उनकी मौत के कारणों का पता नहीं लगाया जा सका।
पर छान-बीन में सबसे हैरानी की बात यह सामने आई की 80 और 90 के दशक में लंदन की संगीत से जुडी कई प्रमुख हस्तियों के बीच अच्छी तरह से जानी जाने वाली जायस को तीन वर्षों के दौरान किसी ने एक बार भी याद नही किया। और उनके घर से बदस्तूर सड़ांध आने के बावजूद मौत की खबर को आम होने में लम्बा अरसा लगा।
वर्ष-2013, ब्रिघटन
अगर मकान मालिक को घर की सफाई कराने का ख्याल न आता तो शायद सिमोन एलैन का 3 साल का इंतजार और लम्बा रहता...
अकेलेपन के अगले शिकार लोगों में अगली दास्तान हैं सिमोन एलैन की। ब्रिघटन में रहने वाले ब्रिटिश मूल के सिमोन को जिसने भी जाना उसे वो बेहद अकेले ही लगे। पड़ौसी हो या मकान मालिक सभी को वो हमेशा अपने अकेलेपन की इकलौती साथी शराब के साथ अपने आप में सीमित नज़र आए। और एक दिन अचानक वो नजर आना बंद हो गए।
पड़ौसियों ने समझा शराबी सिमोन उनका पड़ौस छोड कर चले गए हैं। वहीं मकान मालिक को सिमोन द्वारा महीनों, सालों से किराया नहीं देने का ख्याल तक नही आया और जब ख्याल आया तो वो भी पडोसियों के सिमोन के घर के पास से गुजरने पर आने वाली सड़ांध की शिकायत करने पर।
मालिक को लगा कि सिमोन बहुत पहले ही घर खाली करके जा चुके हैं तो शायद गंदगी की बदबू होगी। घर की सफाई के लिए उन्होंने कुछ लोगों को सिमोन के घर भेजा, जहां उन्हे रॉकिंग चेयर के पीछे फर्श पर पड़ा सिमोन का कंकाल मिला।
पुलिस के अंदाज़े को सही माने तो सिमोन की मौत दिसम्बर 2010 में हो चुकी थी जबकि उनकी आयु 50 वर्ष के आसपास रही होगी। उनके शव रुपी कंकाल को फरवरी 2013 में उनके घर से प्राप्त किया गया। अन्य एकांकी लोगों की तरह भी उनका न तो कोई दोस्त ही मिल पाया, न ही कोई संबंधी सामने आया और न ही उनकी मौत का कारण तय हो पाया।
वर्ष 2013- फ्लोरिडा
फ्लोरिडा निवासी जिनेवा चैम्बर, जो कि मिलने से पहले शायद तीन साल से मृत थीं
अगस्त 2013 में फ्लोरिडा स्थित अपने घर से जिनेवा चैम्बर के विक्षिप्त शव को प्राप्त किया गया।
छानबीन करने में पुलिस को पता चला कि जिनेवा एक सनकी किस्म की महिला थी। कभी वो गुस्सैल मिज़ाज महिला की तरह लोगों को अपने घर के सामने से गुजरने तक नही देती थी तो कभी उनका मुस्कान और कुकीज़ के साथ अभिवादन करती थकती न थी।
जिनेवा के पड़ोसियों को जब उनकी मौत का पता चला तो वे आश्चर्य से भर गए कि इतने सालों तक जिनेवा के दोस्तो और रिश्तेदारों को उसका ख्याल क्यों नही आया। उन्होंने जिनेवा को हमेशा अकेला ही देखा था और इसी कारण से वो पिछले तीन सालों से जिनेवा की मौत से अनजान उसके बागीचे का ख्याल रख रहे थे। एक वर्ष पूर्व जब जिनेवा के विरुद्ध फौजदारी मुकदमा करते हुए प्रशाशन ने उसे दी जाने वाली सारी सुविधाओं को बंद कर दिया था, तब भी प्रशासन की ओर से किसी ने जिनेवा के कोई जवाब न दिए जाने की परवाह नहीं की।
जिनेवा के पडोसियों की माने तो उसे आखरी बार लोगों को कुकीज़ खिलाते हुए अप्रैल 2010 में देखा गया था। उसके बाद से किसी ने भी उसे घर के बाहर नही देखा।
अमेरिका जैसे विकसित देश में लोगों को सभी सुख सुविधाएं तो आसानी से मिल जाती हैं पर उनके रिश्तों का ताना-बाना कभी व्यवस्थित नही हो पाता। बच्चे बड़े होते हैं तो मां बाप अकेले हो जाते हैं। नए रिश्ते बन जाते हैं तो पुराने कभी भूल से भी याद नही आते।
ऐसा ही कुछ किस्सा है अमरीका के एक बडे शहर मिलवॉकी में रहने वाले डेविड कार्टर का। डेविड एक खुशमिजाज़ नौकरीपेशा इंसान थे। वे मिलवॉकी में उपद्रव नियंत्रण अधिकारी के तौर पर कार्यरत थे और उनके मज़ाकिया स्वभाव और अच्छे चरित्र के कारण उनके चाहने और मिलने वालों की कोई कमी नहीं थी। फिर भी अचानक से 2007 में उन्होंने यह कहते हुए अपनी नौकरी से इस्तीफा दे दिया कि अब वो न्यू मैक्सिको में जाकर बसना चाहते हैं और इस मामले में बेहद गंभीर हैं..। कितने गंभीर - कि हकीकत ये है कि नौकरी छोड़ने के कुछ समय बाद ही उन्होंने अपनी ही रिवॉल्वर से आत्महत्या कर ली थी।
वर्ष-2012, मिलवॉकी, अमेरिका
डेविड ने आत्महत्या तो कर ली पर उन्हे ये नहीं पता था कि वो अपने चाहने वालों की नजरों से दूर होते ही उनके दिमाग से भी दूर हो गए हैं...
ऐसा ही कुछ किस्सा है अमरीका के एक बडे शहर मिलवॉकी में रहने वाले डेविड कार्टर का। डेविड एक खुशमिजाज़ नौकरीपेशा इंसान थे। वे मिलवॉकी में उपद्रव नियंत्रण अधिकारी के तौर पर कार्यरत थे और उनके मज़ाकिया स्वभाव और अच्छे चरित्र के कारण उनके चाहने और मिलने वालों की कोई कमी नहीं थी। फिर भी अचानक से 2007 में उन्होंने यह कहते हुए अपनी नौकरी से इस्तीफा दे दिया कि अब वो न्यू मैक्सिको में जाकर बसना चाहते हैं और इस मामले में बेहद गंभीर हैं..। कितने गंभीर - कि हकीकत ये है कि नौकरी छोड़ने के कुछ समय बाद ही उन्होंने अपनी ही रिवॉल्वर से आत्महत्या कर ली थी।
अब किन परिस्थितियों के चलते उन्होने ये कदम उठाया ये बात करना अब फिज़ूल है, पर यह कयास तो लगाया ही जा सकता है कि शायद उन्हें ये उम्मीद नहीं रही होगी कि हर समय उनके साथ की इच्छा करने वाले उनके यार दोस्त उन्हे कुछ ही दिनों में भुला कर आगे बढ़ जाने वाले हैं।
वर्ष 2012 में उनके घर को खाली जान कर जब एक रीयल एस्टेट एजेंट ने उनके घर में घुसने का साहस किया तो घर के मालिक को सीढ़ियों के पास लगभग कंकाल हो चुकी अवस्था में पड़ा पाया। उसके सिर पर गोली का निशान था और हाथ जो कि सीने से चिपका हुआ था उसमें रिवाल्वर थमा हुआ था। और सबसे खास बात यह है कि वो दिन डेविड के 45वें जन्मदिन का दिन था।
वर्ष-2011, न्यू साउथ वेल्स, ऑस्ट्रेलिया
ऑस्ट्रेलिया की बुजुर्ग महिला जिसने जीते जी तो किसी का साथ नहीं पाया पर मरने के बाद जायदाद के लिए रिश्तेदार कोर्ट तक जा पहुंचेअचानक आठ साल के लम्बे अर्से के लिए नताली वुड कहां गायब हो गई, न तो किसी ने ये जानने में दिलचस्पी दिखाई और न ही किसी ने उसे याद करने का कष्ट ही किया।
अब तक हमने जितने लोगों के बारे में पढ़ा वो हमेशा से अकेले थे और हमेशा के लिए अकेले ही रह गए। पर नताली के शव को रिश्तों से खचाखच भरे माहौल में भी कब्र तब पहुंचने में आठ सालों का लम्बा वक्त तय करना पड़ा..., जिनके 13 करीबी रिश्तेदार होते हुए भी उन्हें पूछने के लिए कोई न मिला। उन में से किसी ने भी पुलिस को उनकी गुमशुदगी की सूचना देने का कष्ट नहीं उठाया।
उनके पडोसियों ने उनके अचानक से दिखना बंद हो जाने को सामान्य मान लिया, यहां तक कि प्रशासनिक अधिकारियों ने भी उनकी खोज-खबर नहीं ली और उनकी मौत को लम्बा अरसा गुजरने के बाद भी उनके बैंक खाते में उनकी वृद्धावस्था पेंशन जमा करवाते रहे जबकि उनके खाते में कोई निकासी दर्ज नही थी। जब तक वो जीवित थीं वो नियमित रुप से अपने भाई के घर रात के खाने पर जाती थीं लेकिन अचानक से यह सिलसिला रुकने पर उनके भाई के परिवार को भी कभी उनका ख्याल नही आया।
वर्ष 2011 में आखिरकार उनकी भाभी डजैविलेन ने न्यू साउथ वेल्स की पुलिस को दरख्वास्त लगाई की
उनहोने नताली को आखरी बार वर्ष 2003 में अपने घर पर रात के खाने के दौरान देखा था जब उन दोनों में जमकर कहा सुनी हुई थी और उसके बाद से उनकी कोई खोज खबर नही है।
![]() |
| नताली वुड का घर जहां वो मृत पाई गईं थी |
डजैविलेन के आग्रह पर पुलिस उनको साथ लेकर नताली के घर में घुसी और तब उन्हें नताली के कमरे के फर्श पर हड्डियों का एक कंकाल मिला जिसकी पहचान बाद में नताली के रुप में हुई। शुरुआती जांच में पुलिस को पता चला कि नताली वुड की मृत्यु को 8 वर्ष का समय हो चुका है और उसके कंकाल को उसके निकट संबंधी को सौंप दिया गया।
कुछ दिनों बाद जांच के सिलसिले में पता चला कि नताली के बैंक खाते में 74,000 डॉलर की राशि जमा है और सिडनी जैसे बड़े शहर के उच्चवर्गीय इलाके में स्थित उनका पैतृक घर जहां उन्हे मृत पाया गया था, वो भी 1000,000 डॉलर से कम का नही है। इस तथ्य के जगजाहिर होते ही सरकार के पास उनकी संपत्ति के दावेदारों का मज़मा सा लग गया है। संपत्ति की खींचतान को लेकर कुछ लोग अदालत के दरवाजे पर जा पहुंचे हैं हांलाकि उनकी संपत्ति को सौंपे जाने के विषय में अभी तक कोई निर्णय नही लिया जा सका है।








.jpg&container=blogger&gadget=a&rewriteMime=image%2F*)













