खातीजा अकबर
द्वारा लिखी गई मधुबाला की जीवन की कहानी “द स्टोरी ऑफ मधुबाला” से चुने हुए अंश
मेरे छोटे से मन में,छोटी सी दुनिया रे....
ये गीत सभी की जुबान पर चढ़ गया। बिना संकोच के बेहद सहजता से कैमरे के सामने,बिना जल्दबाजी किए - जो कि सभी बाल कलाकारों के लिए भारी मुसीबत होता है - मधुबाला ने अपनी पहली फिल्म को एक दक्ष नाविक के समान खेया , उसका आत्मविश्वास प्रचुर प्रतिभा का प्रमाण था।
पृष्ठ संख्या 44
व्यावसायिक तौर पर किशोर आयु में ही मधुबाला लोगों के लिए ईर्ष्या का पर्याय हो गई थीं। लेकिन ये स्थिति उनके लिए किस्मत का तोहफा नहीं बल्कि उनके अथक परिश्रम का उपहार था। उन्होंने आठ वर्ष की उम्र से फिल्मों में काम करना शुरू किया, इस बात से पूरी तरह सचेत कि उनके परिवार और उनकी भलाई उनपर आश्रित है। इस तथ्य ने उनके स्वभाव को सही वक्त से कहीं पहले परिपक्व बना दिया और यह बात किसी के लिए भी आश्चर्य से कम नही कि जब उन्होने फिल्मों में काम करना बंद किया तो उनकी आयु मात्र सत्ताईस वर्ष थी।
पृष्ठ संख्या 61
निजी तौर पर तराना फिल्म को साइन करने के साथ ही नवयुवा और चुलबुली मधुबाला ने खुद को एक ऐसे मोड़ पर ला छोड़ा था, जहां से कदम सिर्फ एक ही दिशा में जा सकते थे। उन्होने अपना दिल तराना के अपने सह कलाकार को दे दिया, और ये उम्रभर का सच था.... दुनिया से आगे जिस रास्ते को उन्होने प्रेम और आनंद से सजाया वो जाके चरम दुख, क्रांति और सदमे पर थमा।
पृष्ठ संख्या 105
मधुबाला और दिलीप कुमार के प्यार में दिलचस्प चलचित्र के सभी अवयव तत्व मौजूद थे। सुंदरता का उत्कर्ष, अनुराग, गलतफ़हमी, नफ़रत, अदालत का दृश्य और सबसे चरम.. दिलों के टूटने की झनकार। नहीं था तो केवल यह -कि ये कोई परिकल्पना नही थी। यह सभी कुछ बेहद वास्तविक था। और जब ये अपने विनाशकारी अंत पर पहुंचा, तो इसके सभी किरदारों पर इस तूफान के अमिट निशां ही शेष बचे।
पृष्ठ संख्या 39
मुझे जीने दो भगवान...
अपनी मौत से कुछ दिन पहले मधुबाला बुदबुदा रही थीं: “अल्लाह मैं मरना नहीं चाहती। मैं जीना चाहती हूं...... भगवान मुझे जीने दो।” फिर भी उनकी रुह उन्हें छोड कर चली गई। 14 फरवरी को अपने छत्तीसवें जन्मदिन के नौ दिन बाद 23 फरवरी 1969 को मधुबाला अपनी जिंदगी के संघर्ष में हार गईं।
पृष्ठ संख्या 226
ऐसे लोग मरते नहीं...
इस दुनिया में ऐसे कुछ ही लोग हैं जिन्हें हम उनकी जिंदादिली, मुस्कुराहट और खिलखिलाहट में हमेशा याद रखना चाहते हैं। आप उनकी कभी मृत कल्पना कर ही नही सकते। वे हमेशा के लिए जीते हैं और हमेशा तक जीते हैं। मधुबाला उन्ही लोगों में से एक नाम है।
पृष्ठ संख्या 226
संकलन- निधि रावत
इस दुनिया में ऐसे कुछ ही लोग हैं जिन्हें हम उनकी जिंदादिली, मुस्कुराहट और खिलखिलाहट में हमेशा याद रखना चाहते हैं। आप उनकी कभी मृत कल्पना कर ही नही सकते। वे हमेशा के लिए जीते हैं और हमेशा तक जीते हैं। मधुबाला उन्ही लोगों में से एक नाम है।
पृष्ठ संख्या 226
संकलन- निधि रावत



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