बच्चे अपनी तरह से दुनिया
को देखते, समझते और ग्रहण करते हैं और कई बार उनकी सोच बड़ों-बड़ों को हैरत में
डाल देती है। ऐसा ही हुआ दिल्ली के बाल भवन स्कूल की दूसरी कक्षा में जबकि ईवीएस (एन्वायरनमेन्टल साईंस)
पीरियड के दौरान अध्यापिका ने छात्रों से अपनी अपनी कॉपियों में मंदिर का चित्र बनाने
को कहा। जहां और छात्रों ने मंदिर की चाहरदीवारी बनाकर उसमें भगवान की मूर्ति
दर्शाई वहीं एक छात्र अनमोल सिंघल ने मंदिर की चाहरदीवारी के बीचों-बीच एक दानपेटी
बनाई और उसमें पैसे डालते हुए एक व्यक्ति को दर्शाया। अनमोल द्वारा बनाए गए मंदिर
के चित्र में भगवान कहीं नहीं थे। अध्यापिका ने जब इस सात साल के बच्चे से पूछा कि
तुमने यह दानपेटी क्यों बनाई, भगवान क्यों नहीं बनाए?.... तो बच्चे का जवाब था कि
भगवान तो अन्दर होते हैं। मन्दिर में बाहर तो हर तरफ ऐसे मनी बॉक्स (दानपेटी) ही होते
हैं जिनमें हमें पैसे डालने होते हैं। सात साल के छात्र के इस जवाब से अध्यापिका
हैरान भी हुईं और बच्चे की अवलोकन क्षमता पर उन्हें बेहद खुशी भी हुई।
हिन्द प्रहरी संवाददाता


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