Wednesday, 19 February 2014

रंग-ए-जहान

क्या यह मुकम्मल मोहब्बत की दास्तान है... ??


ताज्जुब होता है, कोई कैसे अपनी मोहब्बत को इतने ज़ख्म दे सकता है। 

17 साल पहले किसी चाहने वाले की सनक ने तेजाब से ‘मुस्कान’ का सबकुछ छीन लिया। मुस्कान आज मुस्कुराते हुए भी रोती हुई नज़र आती है।

वायएमसीए में एक दोस्त से मिलने गया था। दोस्त को आने में देर हो गई। तभी मेरी निगाह एक अजनबी से चेहरे पर पड़ी...।उसने अपना चेहरा आधा ढका हुआ था। कुछ अलग नज़र आया तो मैंने उसकी एक तस्वीर खींच ली। तभी वो मेरे पास आई और बोली.. मेरी तस्वीर दिखाओ, आजतक किसी ने मेरी तस्वीर नहीं खींची।



मैं समझ गया क्यों। जब मैंने उसे तस्वीर दिखाई तो भरे हुए गले से हंसने लगी। बोली- आप राजस्थान से हो.. मैंने कहा हां.., और वो मुस्कुराते हुए मुझसे बात करने लगी। उसका चेहरा देखकर मुझे बड़ा ताज्जुब हुआ। मैंने पूछा- क्या भीख मांगने के लिए तुमने अपने आपको ऐसा किया है? मुस्कान बोली.. नहीं साहब, मेरे चाहने वाले ने मेरी ज़िंदगी खराब कर दी। आजतक उसी के दिए ज़ख्मों को ठीक करने की लड़ाई लड़ रही हूं। 


इससे पहले कि कुछ और पूछता वो खुद ही बोली...17 साल पहले मैं भी सुंदर थी। मेरा भी घर था। भरा-पूरा परिवार था। लेकिन आज मुझे कोई नहीं पूछता सिवाय मेरे सड़क पर रहने वाले दोस्तों के।

 


रूप कितना ज़रूरी है, इसका जवाब उसने बिना पूछे दे दिया। बताया..गांव वालों ने, समाज ने इसलिए गांव से निकाल दिया क्योंकि बच्चे डरते थे मेरी शक्ल देख कर।.. खैर साहब आप पत्रकार हैं? मैंने कहा.. दोस्त, बस तस्वीरों से ज़िंदगी बयां करता हूं..? मुस्कान ने पूछा..आप मेरी तस्वीरें दुनिया को दिखाओगे? मैंने कहा.. ज़रूर। इसलिए आपके सामने चाहने वाले द्वारा दिए गए ज़ख्मों की सच्चाई चंद तस्वीरों में बयां की है..



अमित कुमार शर्मा
फोटो जर्नलिस्ट
हमेशा अपना कैमरा साथ लेकर घूमने वाले अमित ज़िंदगी के रंगों को तस्वीरों में उतारते हैं। उनके द्वारा ली गईं ऐसिड विक्टिम की तस्वीरें और उसकी दास्तान ही आपने ऊपर पढ़ी है



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