Wednesday, 9 April 2014

"तोत्तो चान: खिड़की में खड़ी छोटी सी लड़की"... आपको वापस अपने बचपन में ले जाएगी तोत्तो-चान


"तोत्तो चान:  खिड़की में खड़े छोटी सी लड़की" जापानी में लिखी गए बेहद रोचक और लोकप्रिय किताब है भारत में नेशनल बुक ट्रस्ट एस किताब को हिंदी और अन्य पढ़ी जाने वाले भाषाओँ में लेकर आये हैं। नन्ही सी तोत्तो चान अब बड़ी होकर तेत्सुको कुरोयानागी के नाम से जापानी टेलीविजन पर धूम मचाए हुए है। वह अपने स्कूल के बारे में ढेरों बात कर सकती है। जापान में यूनिसेफ की इस सद्भावना दूत के पास उनको देने के लिए बहुत कुछ है जिनका बच्चों से कोई न कोई संबंध है - चाहे वो शिक्षक हों या माता पिता, दादा दादी या नाना नानी और इसमें बच्चें तो शामिल हैं ही। जापान से दुनियाभर में लोकप्रिय हो रही यह पुस्तक पूरी शक्ति के साथ संदेश देती है..

खिलने दो सैंकडों फूल,
होने दो हजारों विचारधाराओं में संघर्ष।

हेडमास्टर के यह कहने के बाद कि अब तुम इस स्कूल की छात्रा होतोत्तो चान के लिए अगली सुबह का इंतजार मुश्किल हो गया। आज से पहले उसने किसी भी दिन का इतनी बेसब्री से इंतजार नही किया था। नन्ही तोत्तो चान ने तोमोए गाकुएन स्कूल के बारे में महसूस किया था - एक ऐसा वातावरण जो उसे और उसकी कक्षा के सभी बच्चों को पसंद था,एक ऐसे हेडमास्टर जो पोशाक और पाठ्यक्रम से कहीं ज्यादा ध्यान बच्चों के स्वादिष्ट खाने पर देते थे। सभी बच्चे संगीत सीखते, खेलों में भाग लेते, गर्मियों में कैंपिंग करते, गर्म पानी के सोते तक चलकर जाते, नाटक खेलते और खुले में रसोई बनाने का आनंद उठाते। तो आईए पढ़ते हैं किताब की कुछ झांकियां जो आपको गुदगुदाएंगी और साथ ही  आपको आपके बचपन को टटोलने पर भी मजबूर कर देंगी।

आफत की पुड़िया

इसके अलावाशिक्षिका ने जोर से कहा, “अगर मैं यही गिन पाती कि वह क्या-क्या करती है तो मुझे आपसे उसे किसी दूसरे स्कूल में ले जाने को न कहना पड़ता।
अपने को कुछ संयत करते हुए शिक्षिका ने सीधे मां की ओर देखा, “कल तोत्तो चान रोज की तरह खिड़की के पास खड़ी थी। मैं अपना पाठ पढ़ाती रही। सोचा कि शायद वो साजिंदो का इंतजार कर रही होगी। अचानक आपकी बेटी ने किसी से पूछा,“क्या कर रही हो,” मैं जहां थी वहां से मुझे कोई दिखा ही नही, इसलिए मैं जान नही पाई कि आखिर वह किससे बातें कर रही है। उसने फिर अपना प्रश्न दोहराया, मुझे लगा वो सड़क पर खड़े किसी व्यक्ति से नही बल्कि  उपर किसी से बात कर रही है। मेरी जिज्ञासा बढ़ी। मैं उत्तर सुनने की चेष्टा करने लगी। पर जवाब आया ही नही। पर आपकी बेटी बार-बार अपना प्रश्न दोहराती रही, “क्या कर रही हो,”इतनी बार कि पढ़ाना ही मुश्किल हो गया। मैं यह देखने गई कि आखिर वो ये प्रश्न किससे कर किससे रही है। जब खिड़की से सिर निकाल उपर की ओर देखा तो पाया कि वहां ओरी पर घोंसला बनाती दो अबाबील चिडि़यां थीं। वह अबाबीलों से बात कर रही थी। मैं बच्चों को समझती हूं। यह भी नही कहना चाहती कि अबाबीलों से बात करना बेवाकूफी है। पर फिर भी मुझे लगता है कि कक्षा के बीच में अबाबीलों से यह पूछना कि वे क्या कर रही हैं, कतई गैर-जरुरी है।
      पृष्ठ संख्या 5

रेडियो मसखरे

कल तोत्तो चान बड़ी अशांत थी। मां ने कह दिया था अब तुम रेडियो पर मसखरों को नही सुनोगी। जब उसने स्कूल जाना आरंभ किया, उससे भी पहले से उसे राकुगोमसखरों को सुनना अच्छा लगता था। उनके मजाक बड़े अच्छे लगते थे और कल से पहले मां ने इस पर कभी आपत्ति नहीं की थी।
पिछली रात डैडी के आर्केस्ट्राके कुछ मित्र आए और बैठक में अभ्यास करने लगे। सैलो बजाने वाले त्सुनेसादा ताचीबाना तुम्हारे लिए केले आए हैं।मां ने कहा। तोत्तो चान खिल उठी। उसने शिष्टता से झुककर ताचीबाना के प्रति आभार दर्शाया और मां से कहा, “यह तो साला बड़ा बढ़िया हुआ।
इसके बाद जब मां-डैडी न होते, तब उसे छिपकर रेडियो सुनना पड़ता।
       पृष्ठ संख्या 30

प्रगति पत्र

तोत्तो चान न दांए झांक रही थी, न बाएं। स्टेशन से घर के रास्ते पर वो बेतहाशा भाग रही थी।
घर पहुंचते ही उसने जोर से घोषणा की, “मैं आ गई !इसके बाद वो रॉकी को ढूंढने लगी। रॉकी बरामदे की ठंडक में पसरा पड़ा था। तोत्तो चान ने मुंह से कुछ नहीं कहा। उसने बस्ते से अपना प्रगति पत्र निकाला - अपना पहला प्रगति पत्र। खोलकर उसे ठीक रॉकी की नाक के सामने किया ताकि वो उसे साफ-साफ देख सके। देखो !उसने गर्व के साथ कहा। प्रगति पत्र में कहीं था तो कहीं बी। साथ ही दूसरे चिन्ह भी थे। तोत्तो चान को तब तक ये पता नही था कि ’ ‘बीसे बेहतर होता है या बी’ ‘से। वह यह भी जानती थी कि रॉकी के लिए यह समझना और भी मुश्किल होगा। पर अपना प्रगति पत्र वो सबसे पहले रॉकी को ही दिखाना चाहती थी। उसका विश्वास था कि रॉकी उसे देखकर बहुत-बहुत खुश होगा।
रॉकी ने अपने सामने खुले कागज को सूंघा। फिर वो तोत्तो चान की ओर ताकने लगा। मान गए ना,” तोत्तो चान ने कहा,“ढेरों कठिन शब्द भरे हैं इसमें, इसे पूरा तो क्या पढ़ पाओगे तुम,” रॉकी ने अपनी गर्दन कुछ टेढ़ी की, मानो वो प्रगति पत्र एक बार फिर देख रहा हो। इसके बाद उसने तोत्तो चान का हाथ चाट लिया। तो ठीक है।तोत्तो चान ने संतोष से कहा, “अब मैं इसे मां को दिखाती हूं।

    पृष्ठ संख्या 36

कूदने से पहले देखो !

स्कूल से घर के रास्ते में घर के बिल्कुल पास ही तोत्तो चान को सड़क पर एक लुभावनी चीज दिखी। रेत का एक बड़ा सा ढेर। समुद्र से इतनी दूर रेत का बड़ा सा ढेर देख वो आश्चर्य से भर गई। कहीं यह सपना तो नही। वो ख़ुशी से भर उठी। एक छोटी सी कूद मार कर तेजी से रेत के शिखर पर जा चढ़ी और जोर से उसके बीचो बीच कूदी। पर ढेर असल में रेत का नही था। बीच में था दीवारों पर लगने वाला पलस्तर। छपाक से वो अंदर जा डूबी। तुरंत ही छाती तक वह किसी मूर्ति के समान पलस्तर से पुत गयी - अपने बस्ते और जूतों वाले झोले के साथ। जितना निकलना चाहती, उतना उसके पैर फिसलते। जूता मानो पैर से निकलना ही चाहता था। बिना हिले डुले स्थिर खड़े रहने के अलावा उसके पास कोई चारा नही था। जूते का झोला पकड़े उसका बायां हाथ भी उस गिलगिले पलस्तर में धंसा हुआ था। पास से एक-दो स्त्रियां गुजरीं। वह उन्हें जानती नही थी। हर बार उसने धीमी आवाज में कहा,“माफ कीजिए। पर उन्होने सोचा कि बच्ची खेल रही है, और वह मुस्कुराती हुई आगे बढ़ गयीं। शाम हो चली। धीरे-धीरे अंधेरा होने लगा। मां उसे ढूंढने निकली। उस ढेर में से तोत्तो चान का सिर निकला देख कर वह अवाक् रह गई। कहीं से उसने एक बांस ढ़ूंढा और तोत्तो चान को बाहर निकाला। पलास्तर से सनी तोत्तो चान बिल्कुल एक दीवार के समान लग रही थी। मेरे ख्याल से मैं एक बार पहले भी बता चुकी हूं,” मां ने कहा, “कि जब भी कोई नई चीज दिखे तो सीधे उसमें कूदो मत। कूदने से पहले देख लो !

मां जिस एक बार पहलेका जिक्र कर रही थी,वह घटना घटी थी स्कूल में खाने की घंटी के दौरान। तोत्तो चान उस दिन अपने दोस्तों के साथ सभागार के पास टहल रही थी। रास्ते में उसने एक अखबार पड़ा देखा। उसने सोचा अखबार पर कूदने में मजा आएगा, तो वो तेजी से दौड़ी और अखबार के बीचो बीच कूदी। पर अखबार का वो टुकडा चैकीदार ने मलकुंड को ढंकने के लिए रखा था। उसे कुछ काम था, इसलिए वह कंक्रीट का ढकना हटाने के बाद गड्ढे के मुंह को अखबार से ढंक कर चला गया था ताकि बाहर बदबू न फैले। सच बहुत ही बुरा हुआ था उस दिन। तोत्तो चान सीधी मल के अंदर धड़ाम से जा गिरी थी। बेहद मेहनत के बाद वो लोग फिर से तोत्तो चान को साफ सुथरा बना पाए थे।
     पृष्ठ संख्या 60 – 61



संकलन- निधि रावत

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