Thursday, 3 April 2014

जो घंटियों के सुरों से गुंजित गंगा घाट पर रमणने की तमन्ना है, तो चले आओ बनारस... जो भक्ति और शक्ति के रंग में डूबने की तमन्ना है.., तो चले आओ बनारस...

देश की सबसे पवित्र नगरी बनारस जिसे काशी और वाराणसी भी कहा जाता है, दुनिया के प्राचीन शहरों में से एक हैं। गंगा घाट पर बसी काशी नगरी की धरती इतनी पवित्र है कि यहां मौत भी आए तो कहते हैं सीधे मोक्ष की प्राप्ति होती है। यहां के मणिकर्णिका घाट पर एक साथ कई चिताओं को जलते देखा जा सकता है तो दशाश्वमेध घाट पर सुबह शाम होने वाली भव्य आरती बनारस की फिज़ा में आस्था और भक्ति का ऐसा रंग घोलती है कि देखने वाला भाव-विह्वल हो जाता है। वाराणसी के घाट से सुबह का नज़ारा अद्भुत है तो सिंदूरी रंग की शाम भी देखने वाले को प्रकृति की प्रशंसा करने पर मजबूर कर देती है। काशी के घाटों पर भगवा पताकाएं हैं, जलती चिताएं हैं, शांत खड़ी नावें हैं तो कोलाहल करते पर्यटक और सांझ-सवेरे की आरती के स्वर भी हैं। साधू-संतों की धरती वाराणसी फिलहाल इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि यहां से भाजपा के प्रधानमन्त्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी चुनाव लड़ रहे हैं। काशी के इन रंगों को आप भी देखिए रवि दूबे द्वारा खींची गई तस्वीरों में...





दशाश्वमेध घाट पर भव्य आरती का समां



भोर की पवित्रता से धुला गंगा घाट और यात्रियों की बाट जोहती नावें



बनारस का बाज़ार





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