हमारे चंडीगढ़ संवाददाता से
जन्नत बहुत नम्रता से मिलीं और बेबाकी से अपनी बात रखी। आपके लिए प्रस्तुत हैं
साक्षात्कार के कुछ अंश
क्या आप ‘आप’ को अपना सशक्त
विरोधी मानती है। क्या आप को लगता है कि वो यहां कुछ करिश्मा कर पाएंगे।
‘नॉट एट ऑल’, यह जो एकदम से इतनी ऊंचाईं पर पहुंचे थे ना, धम्म से गिरे। उन्होंने
दिल्लीवालों से इतने वादे किए, सब नकली। अरे भई वो चीज़ बोलो जो आप डिलीवर कर सको।
आज मैं किसी साइकिल वाले से यह नहीं बोलूंगी कि भाई तू मुझे एमपी बना मैं तुझे
मर्सिडीज दे दूंगी, न..., क्या यह मेरे लिए संभव है। कुछ कर ही नहीं पाएंगे। दो
महीने बाद वो मेरा कॉलर पकड़ेगा, मैडम मेरी गाड़ी कहां है? आप वालों ने कह दिया जी
बिजली आधी कर देंगे, पानी फ्री कर देंगे। हम काउंसलर जो पूरे शहर को पानी पहुंचाते
हैं, हम इतना बिल देते हैं। अरे भई जिस चीज़ की सहूलियत है ही नहीं, उसे कैसे दे
दोगे। वैसे भी सरकार तो उनकी कभी भी नहीं बनती। वो तो बस थोड़ी जो वेव आई थी ना
दिल्ली में कि ‘आप’ आई, ‘आप’ आई है, उसके चक्कर में बन गई सरकार। पर अब नहीं कर पाएंगे वो कुछ भी।
आपको क्या लगता है अब जो
सरकार केन्द्र में बनेगी, वो स्थिर सरकार होगी। कोई स्ट्रॉंग नेता हुआ तो वो पांच
साल पूरे कर पाएगा।
कह नहीं सकते। पर हां अगर
कोई स्ट्रॉंग हुआ तो जैसे बहन जी जैसा अगर कोई पीएम होगा तो पांच साल निकल जाएंगे।
छुटपुट से कोई आ गए तब तो रब राखा।
आपका चुनाव लड़ने का मुख्य
मुद्दा क्या है? आपको विरोधी पार्टी के उम्मीदवारों में क्या सबसे बड़ी
नकारात्मक चीज़ दिखती है जो उनके खिलाफ जाएगी?
करप्शन...। देखिए, यह सब
करप्ट लोग है। इनको पूरे मौके चंडीगढ़ के लोगों ने दे दिए। मैं भी इसी शहर से हूं।
सबको मौके दे दिए, कांग्रेस को दे दिया, बीजेपी को दे दिया..। सब करप्ट हैं। वादे
इतने-इतने करते हैं लेकिन निभाने के नाम पर ज़ीरो। आप इन सबके मेनिफेस्टोज़ देखो।
मिस्टर बंसल का पंद्रह साल का मेनिफेस्टो निकाल लो, और अगर वो उम्मीदवार बनते हैं
तो इस बार का भी देख लेना, सेम होगा। वर्डिंग्स बस बदल जाएगी। ए की जगह द लिख
देंगे। द की जगह एन लिख देंगे। बस इससे ज्यादा कुछ नहीं। एक में भी वो टिक नहीं
मार पाए पंद्रह साल में कि मैंने चलो 50 वादे किए थे और इतने पूरे कर दिए। क्योंकि
कुछ किया ही नहीं।
जो रेलवे घूस कांड हुआ वो
क्या बंसल साहब के खिलाफ जा सकता है, उसका प्रभाव पड़ेगा चुनाव में?
सौ फीसदी। आपको लगता नहीं
है। जनता इन्हें नकार रही है।
लेकिन सीबीआई ने तो इन्हें
क्लीन चिट दे दी ना।
वो तो ऑबवीयस है। सीबीआई तो
कॉंग्रेस का तोता है। अपने मिनिस्टर को तो इन्हें बचाना ही था। बेचारे दूसरे को
फंसा दिया। लेकिन आज के लोग बिल्कुल वेबकूफ नहीं हैं, सब जानते हैं।
आपने म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन
चुनावों में भी सही इंसान के लिए मतदान किया।
बिल्कुल किया। देखिए कॉरपोरेशन
एक छोटा बच्चा है एडमिन का। उनका काम क्या है सीवर देखना है, रोड बनानी है और इस
मामले में जो हमें बेहतर दिखता हैं हम उसे वोट करते हैं। अपने वोट का प्रयोग बेहतर
इंसान के लिए करते हैं।
आप के हिसाब से लोग क्या
चाहते हैं। आप बाकी उम्मीदवारों से अलग क्यों हैं।
अरे भाई लोगों को कुछ तो
बेसिक सुविधाएं दी जाएं, बस। वो ताजमहल नहीं चाहते.., क्या चाहते हैं...
पानी, सीवर, रोड्स... बस यह चाहते हैं। आज
तक नेताओं ने वो तो प्रोवाइड नहीं कराईं। मेरे दीप कॉम्प्लेक्स के लोग बेचारे इतने
सालों तक धरने पर बैठे रहे कुछ तो हुआ नहीं। मेरी कोशिश से कैसे हो गया फिर? मैंने इतनी भागा-दौड़ी करी
तभी तो हुआ। मैं वहीं वादे करती हूं जो निभा सकूं। और इसलिए मैं सबसे अलग
हूं।
चंडीगढ़ संवाददाता


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