Friday, 21 March 2014

“हां मैं मोदी जी की फैन हूं... लेकिन उनकी मार्केटिंग की..” चंडीगढ़ से आम आदमी प्रत्याशी गुल पनाग से एक मुलाकात



हम एक बार फिर हाज़िर हैं आपको अपने शहर के प्रत्याशियों से मिलवाने के लिए। इस बार हम आपको बॉलीवुड अभिनेत्री व पूर्व मिस इंडिया गुल पनाग से परिचित करवा रहें हैं जिन्हें सविता भट्टी द्वारा इनकार किए जाने के बाद आम आदमी पार्टी ने चंडीगढ़ से अपना लोकसभा उम्मीदवार बनाया है। हमने अपने कुछ आम सवाल लेकर आम आदमी पार्टी की इस प्रत्याशी से बात की। प्रस्तुत हैं साक्षात्कार के अंश..  

चंडीगढ़ के लोग आपको वोट क्यों दें..?
देखिए मेरा मानना है कि हम एक ऐसे आंदोलन का हिस्सा हैं, एक ऐसे दौर से गुज़र रहे हैं जब हमारा जो सारा लोकाचार है, जिसे कि हम ईथोस भी कह सकते हैं, बदल रहा है। यहां पर भ्रष्टाचार से लोग थके हुए हैं। सबसे बड़ा मुद्दा जो आज ऊपर से लेकर नीचे तक बन चुका है वो है भ्रष्टाचार। हम एक ऐसी लहर से गुज़र रहे हैं जब सब परिवर्तन चाहते हैं, सब बदलाव चाहते हैं। और जिस चीज़ से वो बदलाव चाहते हैं, जिस चीज़ से वो परिवर्तन चाहते हैं, वो है भ्रष्टाचार। मैं उस आंदोलन का हिस्सा हूं जो यहां उस राजनैतिक वातावरण को झाड़ू से साफ करने आया है। और चंडीगढ़ मुझे क्यों वोट दें..,क्योंकि मैं नई पीढ़ी की प्रतिनिधि हूं। और अब तक जो हमारा नेतृत्व रहा है वो उस सोच का हिस्सा रहा है जो अब तक चलती आ रही है। और मैं मानती हूं कि मैं नौजवान पीढ़ी की एक प्रतिनिधि हूं और वो करना चाहती हूं चंडीगढ़ के लिए, जो कि चंडीगढ़ को मिलना चाहिए, हक से।

भ्रष्टाचार से आपका क्या मतलब है?
देखिए चंडीगढ़ के लोग बहुत समझदार हैं। वो अखबार पढ़ते हैं। उनके आस-पास क्या हो रहा है जानते हैं।  कौन किस घोटाले का हिस्सा बना हुआ है, कौन किस पद से इस्तीफा दे चुका है..यह सब पढ़ते हैं। अब अगर आप चाहते हैं कि मैं आपको एक परिभाषा दूं तो वो मैं मानती हूं कि वो गलत होगा। चंडीगढ़ के लोग इतने सक्षम हैं इस मामले में, कि वो सब समझते हैं।
             
चाहें आप शाहरुख खान से बात कर लीजिए, चाहे अमिताभ बच्चन से, गुल पनाग एक हस्ती है जो और लोगों से अलग है

आप चंडीगढ़ के लिए क्या करना चाहती हैं?
देखिए मूल रूप से मैं यह चाहती हूं कि चंडीगढ़ भारत में क्लीन गवर्नेंस की कैपिटल हो। क्योंकि यहां पर वो इन्फ्रास्ट्रक्चर है जिसके ज़रिए यह संभव है। एक पार्टी के तौर पर और मैं उनकी उम्मीदवार के नाते, हम यह चाहते हैं कि जो आप चाहें वो हम करें। एक प्रतिनिधि का जो सबसे बड़ा फर्ज़ है वो यह है कि वो समस्याओं को समझे और उनका सही-सही समाधान निकालने में सहायता करे। मिसाल के तौर पर अगर कहीं पाइप फटी है.., तो एमपी वो पाइप तो ठीक नहीं कर सकता, लेकिन जो एमपी कर सकता है वो यह है कि वो सिस्टम पर दवाब डालें कि इस पाइप को ठीक किया जाए। मेरी भूमिका सही काम के लिए सही लोगों को तलाश करने की है। मैं प्लम्बर नहीं हूं, मैं इलैक्ट्रीशियन नहीं हूं, मैं एक ऐसी इंसान हूं जिसे शायद यहां से वहां भागना है और उस समस्या का समाधान निकालना है। और मेरा सबसे बड़ा रोल यह है कि मुझे लोगों तक पहुंचना चाहिए। जो सिस्टम है उसे इस कदर सुधारना है, इस कदर विकसित करना है कि गवर्नेंस एक फैक्टर ना रह जाए। लोग यह ना सोचे कि ऊपर बैठने वाला आदमी भ्रष्ट है तो कुछ काम नहीं होने वाला, और अगर सीधा है तो बहुत काम होगा। सिस्टम को आत्मनिर्भर होना होगा। सिस्टम को मजबूत होना है, अंतर खत्म करने हैं। इसमें सबसे बड़ी बात यह हैं कि स्वेच्छानिर्णय यानि डिस्क्रीशनरी पावर्स जो एक एमपी या एक ब्यूरोक्रेट के पास है, उस पर लगाम लगनी चाहिए। अगर स्वेच्छानिर्णय की शक्ति नहीं होगी तो आप अपने दोस्त को, अपने भतीजे को, अपने भांजे को कोई फेवर नहीं दे सकते।

आपके ऊपर एक आरोप यह हैं कि आप उपलब्ध नहीं होंगी। आपने अगर चुनाव जीता तो या तो आप दिल्ली में रहेंगी या मुम्बई में..। इस बारे में आपका क्या कहना है?
(मुस्कुराते हुए), देखिए, जितना मुझे मुम्बई से मिलना था, मिल चुका है। आज मेरी एक इज़्जत है। चाहे आप शाहरुख खान से बात कर लीजिए, चाहें अमिताभ बच्चन से। गुल पनाग एक हस्ती है जो लोगों से अलग है। जो अपना सिर बम्बई में ऊंचा करके जी रही थी। उसका एक कारण था। और वो कारण यह था कि मैं जानती थी कि कभी ना कभी मुझे समाजसेवा का हिस्सा बनना है। अब, एक सवाल जो मुझसे अक्सर पूछा जाता है कि जो हमारे विरोधी पार्टी के उम्मीदवार हैं, वो भी बॉलीवुड से हैं फिर मैं अलग कैसे हूं। तो मैं इतना बताना चाहूंगी कि मेरी जो रैप्यूटेशन हैं, अगर आप चैक करें तो वो शुरू से ही ऐसी रही है और जबकि मैं उनसे पच्चीस साल छोटी हूं।  


 क्या आप जानते हैं कि मुझे सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा इन्फ्लुएंशियल लोगों में से एक माना जाता है


आप तो मोदी जी के बहुत मज़बूत समर्थक थे...?
आप बताईए, आप ऐसा क्यों कहते हैं?

आपने कई बार ट्वीट किया है.., फेसबुक पर भी..
कई बार, आप बताईए कौन सा ट्वीट और फेसबुक पर तो मैं हूं ही नहीं जी। और जिसकी बात आप कर रहे हैं, पहले मेरा वो ट्वीट निकाल कर लाईए फिर हम बात करते हैं। आपको गलत जानकारी है। (मुस्कुराते हुए) शायद आप..., मुझे लग रहा है कि आप मोदी जी की तरफ से यहां इंटरव्यू लेने आएं हैं...।

सोशल मीडिया की तरफ से कई बार आपने ट्वीट किया है, मोदी के समर्थन में आपने बोला है...। क्या आप इस बात से इनकार करती हैं?
मैं बिल्कुल इनकार नहीं करती हूं लेकिन मैं आपको समझाना चाहूंगी, कि आप गलत जानकारी के शिकार हैं। मेरे पास लगभग पचहत्तर हज़ार ट्वीट हैं। उनमें से मैंने नीतिश जी के बारे में बहुत कुछ कहा हैं, उनमें से मैंने मोदी जी के बारे में कम से कम दो हज़ार ट्वीट्स में कहा है। यह कम से कम दो-ढाई साल पहले की बात हैं, एक ट्वीट पैटर्न था, उस पर मैंने लिखा था। क्योंकि तब उस दौर में विकल्प नहीं था। लोग थके हुए थे, मायूस थे। जो राइटिस्ट लोग हैं, जो लिबरल्स हैं- मैं अपने आपको लिबरल मानती हूं, वो भी ऐसा सोचते थे कि अब कोई चारा नहीं रहा है, तो उनका झुकाव मोदी जी की तरफ हुआ, क्योंकि कोई विकल्प नहीं था। अब अरविन्द केजरीवाल जी ने एक विकल्प दिया है। मैंने जो लिखा वो एक तंज था, एक कटाक्ष था, यह बताने के लिए कि बॉस हमारे पास या तो कुआं है या खाई है। कुंए में से तो आप निकल कर आ ही रहे हो, खाई भी ट्राइ कर लीजिए।

 मैं चाहती हूं कि चंडीगढ़ भारत में क्लीन गवर्नेंस की कैपिटल बने ”


लेकिन आपने मोदी जी की तारीफ की है।
आप मीडिया वाले दरअसल मिसइन्फॉर्मेशन कैम्पेन के शिकार हैं। जब आप ट्विटर पर जाएं तब कोशिश कीजिए कि उन पचहत्तर हज़ार ट्वीट्स में से उन सभी ट्वीट्स को निकाल कर लाएं जिनमें मैं मोदी जी के बारे में लिख रही हूं। मैं ज़रूर फैन हूं मोदी जी की.. पर उनकी मार्केटिंग की। भारत में हर एक इंसान उनकी मार्केटिंग का फैन है। आप एक ट्वीट निकाल दीजिए जहां मैंने यह लिखा है कि मैं मोदी जी को एडमायर करती हूं, निकाल दीजिए। एक ट्वीट निकालिए जिसमें मैंने मोदी जी की तारीफ की है। देखिए मैं आपको एक बात बताना चाहूंगी। क्या आप जानते हैं कि मुझे सोशल मीडिया में सबसे ज्यादा प्रभावशाली (इन्फ्लुएंशियल) लोगों में से एक कहा जाता है। सोशल मीडिया में कोई भी चीज़ जो लिखी या कही जाती है वो उस तत्कालीन समय का रिएक्शन होता है। मैंने भी ऐसे रिएक्ट किया है लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि मैं मोदी जी की तारीफ कर रही हूं।

लोकपाल पर जो आंदोलन चल रहा था वो राजनीति से बिल्कुल प्रेरित नहीं था। उस वक्त अरविंद केजरीवाल, अन्ना जी और किरण बेदी वगैरह के साथ जुड़े हुए थे। क्या आप उस आंदोलन का हिस्सा बनी थीं। क्योंकि हमने तो आपको उस दौरान कहीं नहीं देखा। लेकिन अब जब केजरीवाल जी ने राजनीतिक पार्टी बना ली तब आपको जोड़ लिया। ऐसा क्यों...?
यह तो आप केजरीवाल जी से पूछिए। देखिए क्या मुझे आपको कन्वेन्स करना पड़ेगा कि मैं उस आंदोलन में शामिल थी। आप जाकर मालूम कीजिए तब आपको पता चलेगा कि मैं उस आंदोलन का हिस्सा थी या नहीं।  

मैं अरविन्द को उस समय से जानती हूं जब हम दोनो ही अलग-अलग, स्वतंत्र रूप से कॉमनवेल्थ गेम्स में हुए भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठाने की कोशिश कर रहे थे।

आप अरविंद केजरीवाल से क्या पहले से जुड़ी रही हैं जो उन्होंने आपको चुना?
मैं आपको बताती हूं। मैं अरविन्द को उस समय से जानती हूं जब हम दोनो ही अलग-अलग, स्वतंत्र रूप से कॉमनवेल्थ गेम्स में हुए भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठाने की कोशिश कर रहे थे। यह उस मुकाम की बात है जब वहां पर लोग, बड़े-बड़े मीडिया हाउस, बड़े- बड़े कैमरे लेकर भी बात करने को तैयार नहीं थे। इस कदर भ्रष्टाचार का हाथ था कॉमनवेल्थ गेम्स में कि पूछिए मत। उस दौरान अरविंद एक संस्था से जुड़े हुए थे, परिवर्तन नाम है उसका, 2010 की बात है यह। उस दौरान हम एक साथ आए। हम जैसे लोगों के बोलने के कारण ही यह इश्यू उठाया गया। यहां मैं यह कहने की कोशिश कर रही हूं कि हम लोगों ने वो काम किया जो ज़रूरी था। अगर कोई एक ऐसा इश्यू उठाता है जो किसी ने नहीं उठाया तो यह बड़ी बात है। और जब बात एक बार खुल गई तो बस हमारा काम हो गया।

पहले अरविंद जी ने कहा कि उनके पास इस भ्रष्टाचार के काफी सारे सबूत हैं और फिर वो बाद में मुकर गए..।
वो सारे सबूत वो दाखिल कर चुके हैं अब प्रॉसीक्यूशन को इस मामले को देखना है।



बी बी बहुगुणा, 
चंडीगढ़ संवाददाता

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