Wednesday, 5 March 2014

विश्व में सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश भारत, अपने इन्हीं दुधारू पशुओं के मांस के सहारे विश्व के सबसे बड़े मांस निर्यातकों में से एक बना...




क्या आपको डराते नहीं यह आंकड़े...


· देश ने 2012-13 में विश्व को 17,400.59 करोड़ रुपये मूल्य के 11069.6 लाख टन भैंस के मांस के उत्पादों का निर्यात किया है

· उत्तर प्रदेश सरकार ने इस वर्ष प्रदेश में 8 नए और अत्याधुनिक बूचड़खाने खोलने को मंज़ूरी दी हैं जिनमें 10000 से 20 हज़ार दुधारू पशु प्रतिदिन काटे जाएंगे।

· 2013 दिसंबर में जारी फिक्की की रिपोर्ट बताती है कि उत्तर प्रदेश 67 प्रतिशत शेयर के साथ भारत से भैंस के मांस यानि बीफ का सबसे बड़ा निर्यातक बन गया है। कृष्ण कन्हैया की जन्मभूमि वाले प्रदेश में गाय भैंसों की संख्या सबसे ज्यादा होने के कारण यहां बूचड़खाने-सह मास-संसाधन इकाईयों की संख्या भी सबसे ज्यादा है। राज्य में बीफ उत्पादन लगातार बढ़ रहा है और 2010 में तो यह चालीस फीसदी तक बढ़ गया है।

· बीफ उत्पादन में उत्तर प्रदेश के बाद आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और पंजाब का नंबंर आता है।

· इन बीफ उत्पादों को मुख्य तौर पर वियतनाम सोशल रिपब्लिक, मलेशिया, थाइलैंड, मिश्र अरब रिपब्लिक, सऊदी अरेबिया और जॉर्डन में निर्यात किया जाता है।

· सरकार की 12वीं पंचवर्षीय योजना 2012-17 के लिए भारत सरकार के पशुपालन व डेयरी विभाग की सलाहकार समिति ने योजना आयोग को एक रिपोर्ट सौंपी है, जिसमें कहा गया है, ‘‘वर्तमान में गो-मांस के निर्यात पर प्रतिबंध है। अतः आयात-निर्यात नीति में आवश्यक संशोधन कर गो-मांस के निर्यात को स्वीकृति दी जाए।’’

· सरकारी तंत्र में पशुओं की बड़े पैमाने पर हत्या कर उसके मांस को विश्व भर में बेचने की योजना बन रही है। योजना के अंतर्गत पशुवध के आंकड़ों को तेजी से बढ़ाना, कार्यरत कत्लखानों का आधुनिकीकरण करना, ज्यादा से ज्यादा यांत्रिक कत्लखाने बनाना, मांस के निर्यात में आने वाले अवरोध हटाना और वह सब करना है जिससे भारत एक अग्रणी मांस निर्यातक देश बन सके।

· भैंसों को मांस के लिए काटने पर भारत सरकार अनुदान भी देती है जिसका सीधा दुष्प्रभाव दुग्ध उत्पादन पर पड़ता है। 


 सुनिए क्या कहती है एपीडा की रिपोर्ट

एपीडा यानि एग्रीकल्चरल एंड प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवेलपमेंट अथॉरिटी की वेबसाइट पर प्रकाशित मीट मेनुअल के चैप्टर 2 में कहा गया है भारत में अपार पशुधन होने के बावजूद गलत धारणाओं के चलते मांस उत्पादकता में पिछड़ा हुआ है। 
हांलाकि भारत विश्व में सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक (117 मिलियन टन) देश होने का दर्जा हासिल कर चुका है लेकिन मांस उत्पाद जो कि डेयरी उत्पादकता से जुड़ा हुआ है अभी भी 6.5 टन मिलियन टन उत्पाद के साथ पांचवे स्थान पर है।
 पिछड़े समुदायो और गरीब किसानों की आर्थिक स्थिति से जुड़े होने के बावजूद मांस उत्पाद भारत के राजनेताओ, नीति निर्माताओं, वैज्ञानिकों और व्यापारियों का ध्यान पूरी तरह से नहीं खींच पाएं हैं। 

मांस उत्पाद करीबी तौर पर चमड़ा उद्योग से जुड़ा हुआ है जिसमें भारत इटली के बाद दूसरा स्थान प्राप्त कर चुका है। और अगर सरकार इस पर सही ध्यान दे तो विश्व चमड़ा और मांस दोनों की उत्पादकता और निर्यात में विश्व में प्रथम स्थान प्राप्त कर सकता है।


बीफ उत्पादन का अर्थशास्त्र

भारत में गाय का मांस 120 रुपए किलो खुलेआम बिक रहा है। एक गाय-भैंस या बैल के कटने पर लगभग 350 किलो मांस निकलता है जबकि चमड़े और हड्डियों की कीमत अलग से मिलती है।
 एक पशु 3000 रुपए से 9000 रुपए तक में ग्रामीणों से खरीदा जाता है। लेकिन उसे काटने के बाद 350 किलो मांस निकलता है। भारत में उस मांस का दाम हुआ- 120x 350 यानि 42,000 रुपए। जबकि चमड़े का दाम हुआ एक हज़ार रुपए। विदेशों में निर्यात करने पर यहीं मांस तीन से चार गुना दामों पर बिकता है। 
अगर पशु खरीद का मूल्य (9000 रुपए) काट भी दिया जाए तो एक पशु काटने पर लगभग 34,000 रुपए का मुनाफा होता है।

औसतन एक बूचड़खाने में रोज़ाना 10,000 से 15,000 तक पशु कट रहे हैं। अगर 12,000 पशु भी मानें तो एक कत्लखाने के मालिक को हर रोज़ 34,000 X 12,000 यानि लगभग चालीस करोड़ रोज़ का मुनाफा होता है। उस पर सरकार से अनुदान मिलता है सो अलग। ऐसे में कोई भी बूचड़खाने को क्यों बन्द करना चाहेगा।


गौ हुंकार रैली में गाय को राष्ट्रमाता घोषित करवाने का संकल्प लिया गया

गाय व अन्य दुधारू पशुओं को बचाने के लिए जिस व्यापक जनआंदोलन की ज़रूरत है, उसी की शुरूआत के रूप में 23 फरवरी, 2014 को दिल्ली के रामलीला मैदान में गौ हुंकार रैली आयोजित की गई। इसमें गोक्रांति के अग्रदूत गोपालमणि महाराज के प्रतिनिधित्व में और हज़ारों साधू संतो की उपस्थिति में गाय को राष्ट्रमाता घोषित करवाने का संकल्प लिया गया। अगर गाच को बचाना है तो इस तरह के जन आंदोलनों की इस देश को सख्त ज़रूरत है।

हिंद प्रहरी संवाददाता




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