सामाजिक रुढ़ियों को तोड़कर समाज से निष्काषित बुज़ुर्ग विधवाओं ने जमकर खेली होली...
15 मार्च को वृंदावन का वो दृश्य देखने लायक था जब यहां के 200 साल पुराने मीरा सहभागिनी आश्रम में लगभग एक हज़ार विधवाओं ने एक दूसरे पर जमकर गुलाल और रंग उड़ाए। अपने परिवार से निष्काषित यह विधवाएं, जिनकी ज़िंदगी फीके रंगों और उदासीन माहौल से भरी है, जब होली के शोख रंगों में रंगकर खुशी से नाच रही थीं और एक दूसरे पर रंग-गुलाल की बौछार कर रही थीं तो लग रहा था मानों श्रीकृष्ण की गोपियां बिना कृष्ण महारास कर रहीं हैं। पहली बार ऐसा हुआ जब इतनी बड़ी संख्या में ये विधवाएं होली खेलने के लिए आश्रम में जुटीं। सैकड़ों पर्यटकों और भगवान श्रीकृष्ण के भक्तों की उपस्थिति में इन विधवाओं ने लगभग 500 किलो गुलाल और कई गैलन पानी एक दूसरे पर डालकर होली मनाई। इनमें से ज्यादातर विधवाओं की उम्र 70 से 80 साल की थी। कुछ अधेड़ उम्र की विधवाएं भी थीं।
यह किसी से छिपा नहीं है कि विधवाओं को भारतीय समाज में अच्छी नज़रों से नहीं देखा जाता, उन्हें समाज की उपेक्षा और परिवार से निष्कासन सहना पड़ता है। वृंदावन में ऐसी हज़ारो विधवाएं रहती हैं जिन्हें उनके अपने घर के सदस्यों ने त्याग दिया है, जो समाज के डर से हरदम संजीदगी का लबादा ओढ़े भगवन भक्ति में लीन रहती हैं। लेकिन इस बार इन्होंने जब हर दुख को भूलकर और हर दायरे को तोड़कर बच्चों की तरह होली खेली और खुशियां मनाई तो नज़ारा अद्भुत बन पड़ा। आपके लिए इस होली की कुछ तस्वीरें...
साभार- डेलीमेल डॉट को डॉट यूके




No comments:
Post a Comment