Wednesday, 12 March 2014

न्यूज़ीलैंड के फिकिनो स्कूल में सालों से पढ़ाई जा रही है संस्कृत



प्राचीन काल से भारत की सभ्यता और संस्कृति का हिस्सा होते हुए भी हम भारतवासियों ने संस्कृत को महत्व नहीं दिया। आज स्कूलों में संस्कृत बहुत कम पढ़ाई और सिखाई जाती है। अपने मातृभूमि पर उपेक्षा का दंश झेल रही संस्कृत विश्व में एक सम्मानीय भाषा और सीखने के महत्वपूर्ण पड़ाव का दर्जा हासिल कर रही है। जहां भारत के तमाम पब्लिक स्कूलों में फ्रेंच, जर्मन और अन्य विदेशी भाषा सीखने पर ज़ोर दिया जा रहा है वहीं विश्व के बहुत से स्कूल संस्कृत को पाठ्यक्रम का हिस्सा बना रहे हैं। आप फिकिनो स्कूल का उदाहरण देख सकते हैं।

न्यूजीलैंड के शहर ऑकलैंड में माउंट इडेन इलाके में स्थित फिकिनो स्कूल में बच्चों की सीखने की क्षमता बढ़ाने और उन्हें अंग्रेजी सिखाने के लिए संस्कृत पढ़ाई जा रही है। यहां इसे बच्चों और अभिभावकों के बीच एक महान भाषा के रूप में प्रचारित किया गया है। फिकिनो स्कूल यह दावा करता है इनकी पढ़ाई मानव मूल्यों, मानवता और आदर्शों पर आधारित है और संस्कृत को इसलिए शामिल किया गया है क्योंकि संस्कृत पढ़ने से बच्चों में सीखने की झमता काफी बढ़ जाती है। यह को-एजूकेशन स्कूल हैं जहां 16 साल तक की उम्र के बच्चे पढ़ते हैं। इस स्कूल में अंग्रेजी, इतिहास, गणित और प्रकृति विषयों की भी पढ़ाई कराई जाती है।

स्कूल के प्रधानाचार्य पीटर क्रॉम्पटन के मुताबिक संस्कृत ही एकमात्र ऐसी भाषा है जो व्याकरण और उच्चारण के लिहाज से परफेक्ट है। संस्कृत ज्ञान के ज़रिए बच्चों को अच्छी अंग्रेजी सीखने का आधार मिलता है, उनमें बेहतर अंग्रेजी बोलने और समझने की क्षमता विकसित होती है। पीटर क्रॉम्पटन का मानना हैं कि दुनिया की कोई भी भाषा सीखने के लिए संस्कृत भाषा आधार का काम करती है। इस स्कूल के बच्चे संस्कृत पढ़ कर बहुत खुश हैं।

फिकिनो स्कूल में दो चरणों में शिक्षा दी जाती है। पहले चरण में दस साल की उम्र तक के बच्चे और दूसरे चरण 16 वर्ष तक उम्र के बच्चों को शिक्षा दी जाती है। पीटर क्रॉम्पटन कहते हैं इस स्कूल में बच्चों को दाखिला दिलाने वाले सभी अभिभावकों का यहीं सवाल होता है कि आप संस्कृत क्यों पढ़ाते हैं। तब हम उन्हें बताते हैं कि यह भाषा श्रेष्ठ है। दुनिया की महानतम रचनाएं इसी भाषा में लिखी गई हैं। हिंदू धर्म के अलावा बौद्ध धर्म और जैन धर्म के भी बहुत से ग्रंथ संस्कृत में ही लिखे गए हैं।


 

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