Wednesday, 26 March 2014

सितारे ज़मीन पर ... कुछ ऐसी होगी बॉलीवुड के अंदाज़ में चुनावी लड़ाई...

यूं तो चुनावों में बॉलीवुड सितारों के उतरने का इतिहास पुराना है, लेकिन इस बार के मुकाबले तो बहुत ज़्यादा रोचक हैं। बॉलीवुड के साथी, विरोधी पार्टियों के प्रतिद्वन्दी बन कर एक दूसरे के खिलाफ चुनाव मैदान में ताल ठोंक रहे हैं। रुपहले पर्दे के सितारे ज़मीन पर उतरकर जनता को बहलाने में लगे है। इनके फिल्मी अंदाज़ को देखते हुए हमने यह कयास लगाने की कोशिश की है कि यह अपने प्रतिद्वदिंयों के बारे में क्या ख्याल रखते होंगे। चुनावी मौसम में फिल्मी सितारों के इस मज़ेदार फिल्मी वाद-विवाद का मज़ा आप भी उठाईए... अगर आप किसी पार्टी के समर्थक हैं तो हमारी इस चुहलबाज़ी को दिल पर मत लीजिएगा। भई यहीं तो समय हैंकि हम इनसे अपना कुछ कह लें, वरना तो बस इनकी सुननी ही हैं...


गुल पनाग (चंडीगढ़ से आप उम्मीदवार)

"ज़रा संभल के किरन जी ६० की उम्र बाली होती है, कदम लड़खड़ा न जाएँ। चुनाव के बाद इन्हीं कदमो से वापस चल के जाना है।"






किरन खेर- (चंडीगढ़ से भाजपा उम्मीदवार) 
"सिक्का सही है या गलत, उसकी पहचान खनक से होती है, पर ये तुम नहीं सुन पाओगी गुल क्योंकि तुम बहरी हो जो देश की आवाज़ नहीं सुन सकती, तुम अंधी हो क्योंकि मोदी के लिए लोगों का प्यार नहीं देख सकती और बहुत जल्दी तुम गूंगी भी हो जाओगी जब तुम्हे झाड़ू उठाने का अफ़सोस होगा"।





हेमा मालिनी (मथुरा से भाजपा उम्मीदवार)- 

"अरे गुल कहाँ से लाई हो ये बकवास डिक्शनरी, नया नौ दिन और पुराना सौ दिन… समझ गयी... मथुरा वासियों आपको तो पता है, मुझे बेफ़िजूल बात करना पसंद नहीं… बस मुझे जीतने की बहुत बुरी आदत है..... नमोः नमोः"









मुनमुन सेन (तृणमूल कांग्रेस) - 

"अरे इनको कुछ मालूम नहीं देश को दीदी चाहिए। फिर देखो कैसे बदलती है सबकी लाइफ"।

नग्मा (कांग्रेस उम्मीदवार) - 

"चुनाव में हमारी भाषा दिल की भाषा होगी.... (बाद का अभी कुछ तय नहीं है)"








जयाप्रदा (बिजनौर से रालोद उम्मीदवार)- 

"में अपना आँचल फैला के वोटों की भीख मांगती हूँ.... में एक कलाकार हूँ... पर मक्कार नहीं..."








परेश रावल (भाजपा उम्मीदवार)

"वो खड़ा है गांधी की तरह, पर झड़ जायगा आंधी कि तरह और आप के आदमी गिरेंगे माचिस की कांडी की तरह.., क्योंकि
जहां धरना है ना, वहां सत्य के लिए जगह नहीं है...... और जहां सत्य है, नमोः है, वहां धरने की ज़रूरत ही नहीं"।



राज बब्बर (कांग्रेस उम्मीदवार)- 

"ऐ आर्मी के अफसर...... ध्यान से देख लो यह भी पुरानी पत्रकार हैं....... इन्हे बड़ा जोश है अच्छे काम करने का.... और हमारी पार्टी का भी बड़ा अनुभव है बुरे काम करने का..... बोलो तुम क्या करोगे....."







शत्रुघन सिन्हा (भाजपा उम्मीदवार)  - 

"खामोश......... जली को आग कहते हैं, बुझी को राख कहते हैं, और जिस आग से बारूद बने, उसे भारतीय जनता पार्टी कहते हैं......"






रवि किशन- (कांग्रेस उम्मीदवार) 

"ई का बोलतानी पटना बाबू.... ज़िन्दगी झंडवा... फिर भी घमंडवा..."






निधि रावत




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