देश के 16वें चुनावों के नतीजे क्या आए मानो चौंकाने वाले तथ्यों का भूचाल आ गया। कांग्रेस के अलावा भारतीय जनता पार्टी देश की दूसरी पूर्ण बहुमत पाने वाली विशुद्ध गैर कांग्रेसी पार्टी बन गई। देश की राजनीति ने केवल दो बार ऐसे जबरदस्त बहुमत से सरकारें बनती देखी हैं। एक 1984 में जब कांग्रेस को ऐसा बहुमत मिला था और एक 2014 में जब भाजपा ने ऐसा जबरदस्त बहुमत पाया है। याद रहे कि यह वहीं भाजपा है जो 1984 में केवल 2 सीटें लेकर आई थी और 30 सालों बाद वहीं भाजपा नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व में 282 सीटें लेकर आई है। 30 सालों में 2 सीटों से 282 सीटों तक का सफर तय करने वाली भाजपा की जीत तो इन चुनावों की अहम खबर रही ही, साथ ही राजनीति के दिग्गजों की हार ने भी इस चुनाव को अभूतपूर्व बना दिया। मोदी की सुनामी में मनमोहन की कैबिनेट भी साफ हो गई। आईए एक नज़र डालते हैं राजनीति के उन बरगदों पर जो, मोदी नाम की आंधी में जड़ से उखड़ गए....
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| मम्मी ने इतनी मेहनत करवाई फिर भी हार गया |
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| खुशी के आंसू रुक ही नहीं रहे, शुक्र है अब मैडम की नौकरी नहीं बजानी पड़ेगी |
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| केवल 44, अब तो लगता है मायके जाना पड़ेगा |
मनमोहन कैबिनेट से केवल 16 मंत्रिय़ों ने चुनाव लड़ा, जिनमें से 13 हार गए
देश में सबसे ज्यादा समय तक सत्तारूढ़ रही कांग्रेस पार्टी ने कल्पना भी नहीं की थी कि उसे इस करारी हार का सामना करना पड़ेगा कि सत्ता तो दूर, प्रमुख विपक्षी पार्टी बनने के लिए भी हाथ पांव मारने की नौबत आ जाएगी। कांग्रेस को केवल 44 सीटें हासिल हुई और कुछ राज्यों में तो उसका खाता तक नहीं खुला। यूपीए के 28 कैबिनेट मंत्रियों में से केवल 16 कैबिनेट मंत्रियों ने यह चुनाव लड़ा था, जिनमें से 13 मंत्रियों को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा। मिलते हैं इन बिगेस्ट लूजर्स से-
1. सलमान खुर्शीद- विदेश मिनिस्टर, फर्रुखाबाद, उत्तर प्रदेश से हारे
2. सुशील कुमार शिंदे- गृहमंत्री, सोलापुर, महाराष्ट्र से हारे
3. कपिल सिब्बल- कानून मंत्री, चांदनी चौक, दिल्ली से हारे
4. फारुख अब्दुल्ला- न्यू एंड रिन्यूएबल ऊर्जा मंत्री, श्रीनगर, जम्मू-कश्मीर से हारे
5. अजीत सिंह- नागरिक उड्डयन मंत्री, बागपत, उत्तर प्रदेश से हारे
6. गुलाम नबीं आजाद- स्वास्थ्य मंत्री, ऊधमपुर, जम्मू-कश्मीर से हारे
7. एम एम पल्लम राजू- एचआरडी मंत्री, काकीनाड़ा, आंध्र प्रदेश से हारे
8. प्रफुल्ल पटेल- भारी उद्योग मंत्री, भंडारा-गोंदिया, महाराष्ट्र से हारे
9. श्रीप्रकाश जैसवाल- कोयला मंत्री, कानपुर, उत्तर प्रदेश से हारे
10. बेनी प्रसाद वर्मा- स्टील मंत्री, गोंडा, उत्तर प्रदेश से हारे
11. गिरिजा व्यास- हाउसिंग एंड अर्बन पॉवर्टी एलीविएशन मंत्री, चित्तोड़गढ़, राजस्थान से हारीं
12. जयपाल रेड्डी- साइंस एंड टेक्नोलॉजी मंत्री, महबूबनगर से हारे
13. चंद्रेश कुमारी- संस्कृति मंत्री, जोधपुर, राजस्थान से हारीं..
कांग्रेस के मंत्रियों को मिली शर्मनाक हार
- मनमोहन कैबिनेट के 28 मंत्रियों में से 12 या तो राज्यसभा सदस्य हैं या उन्होंने चुनाव लड़ने से मना कर दिया जिनमें पी चिदम्बरम, एके एन्टोनी जैसे वरिष्ठ नेता शामिल हैं। जिन 16 मंत्रियों ने चुनाव लड़ा उनमें से केवल संसदीय कार्य मंत्री कमलनाथ, तेल मंत्री वीरप्पा मोईली और रेलवे मंत्री मल्लिकार्जुन खड़गे ही अपनी सीट बचा पाए। बाकी सभी 13 मंत्रियों को शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा।
- स्वतंत्र प्रभार वाले वाले 11 केंद्रीय राज्य मंत्रियों में से कुल 9 मंत्रियों ने चुनाव लड़ा था जिनमें से 6 को करारी हार मिली। हारने वाले इन मंत्रियों में कृष्णा तीरथ, सचिन पायलट, जितेन्द्र सिंह और श्रीकांत जेना भी शामिल है। कृष्णा तीरथ की तो जमानत भी जब्त हो गई। जीत केवल ज्योतिरादित्य सिंधिया, केएच मुनियप्पा और केवी थॉमस को मिली। यह भी बता दें कि इन ग्यारह मंत्रियों में से एक राज्यसभा सदस्य हैं जबकि एक मनीष तिवारी ने चुनाव लड़ने से मना कर दिया था।
- अब बचे 32 केन्द्रीय राज्य मंत्री, जिनमें से 6 या तो राज्यसभा सदस्य हैं, या उन्होंने चुनाव नहीं लड़ा। इनमें राजीव शुक्ला और तारिक अनवर भी थे। बचे हुए 26 चुनाव लड़ने वाले मंत्रियों में से केवल 8 जीत पाए जिनमें शशि थरूर, ई अहमद, केसी वेणुगोपाल और एएच खान प्रमुख हैं जबकि 18 मंत्री चुनाव हार गए। हारने वाले प्रमुख मंत्री रहे मिलिंद देवरा, आरपीएन सिंह, वी नारायणस्वामी और जितिन प्रसाद।
- कांग्रेस के अन्य प्रमुख हारने वाले नेताओं में लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार, अंबिका सोनी, रीता बहुगुणा जोशी प्रिया दत्त, अजय माकन, संदीप दीक्षित और जेपी अग्रवाल रहे।
















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